क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश ने किसानों को भी नुकसान पहुंचाया है। अरहर, बाजरा, सब्जी, तिल्ली की खेती पूरी तरह चौपट हो गयी है। धान की फसल को भी भारी नुकसान हुआ है। कई गांवों में सैकड़ों एकड़ धान की फसल जलमग्न है। धान की फसल पकने की कगार पर है। बारिश के चलते तैयार फसल भी डूब गई है। इससे धान की तैयार फसल में अंकुर फूटने लगे हैं। लगातार हफ्ते भर से ज्यादा समय से डूबी रहने के कारण फसल गलने लगी है। क्षेत्र के विशुनपुरा, हाशापुर, मतलूबपुर, पखनपुर जैसे तमसा के इर्द-गिर्द कई दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। खेतों में अब भी दो से ढाई फीट पानी लगा हुआ है। इससे फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। निचले इलाके में और तमसा के किनारे बसे गांव के किसानों की फसल को भारी नुकसान हुआ। किसान सुबेदार गिरी, देवी पांडेय, टील्लू यादव, राजकुमार सिंह, रवींद्र आदि लोगों का कहना है कि धान की फसलें पकने के कगार पर है। अभी बाढ़ की विभीषिका और पानी का लेबल बना हुआ है जिसे हर ओर परेशानी है। तमसा नदी से अब भी खतरा बना हुआ है।