वहीं, रानी की सराय थाने में FIR के लिए तहरीर दी, फिर भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। मोती लाल यादव ने एसपी से उक्त मामले में उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की। इस संबंध में एसपी ट्रैफिक विवेक त्रिपाठी ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट एक नए तरीके का अपराध है, जिसमें किसी व्यक्ति को फोन कॉल आती है।
इसमें बताया जाता है कि उसका रिश्तेदार या उसका बेटा, कोई पति-पत्नी घायल हो गए हैं अथवा उनके साथ कोई घटना हो गई है उनको पुलिस ने पकड़ लिया है। ऐसे करके उनको कई घंटे तक फोन पर उलझाए रखते हैं और अंत में कहते हैं कि मेरे खाते में पैसा डाल दो। आपके बेटे के लिए इलाज की आवश्यकता है या आपके बेटे या पत्नी को छोड़ने के लिए आवश्यकता है। इसमें कई घंटे तक उस व्यक्ति पर नजर रखी जाती है।
फोन काल से हटने नहीं दिया जाता है। जिससे पीड़ित व्यक्ति अपने रिश्तेदार से संपर्क नहीं कर पाता है। इसलिए इसको डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि अगर इस तरह की काल उनके मोबाइल पर आती है तो घबराने की जरूरत नहीं है सीधे पुलिस से संपर्क करें डायल 112 पर सूचना दें या थाने पर संपर्क कर सकते हैं।