सगड़ी के सेमरी आराजी तिघरा में घाघरा की कटान।
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लाटघाट। सगड़ी के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी के जलस्तर में हो रही घटाव और बढ़ाव के कारण कटान तेज हो गई है। नदी तेजी से कृषि योग्य भूमि को अपने आगोश में लेती जा रही है। रविवार को नदी ने पांच एकड़ फसल को काटकर अपने आगोश में ले लिया।
उत्तरी सीमा से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी में दिन प्रतिदिन घटाव और बढ़ाव का क्रम जारी है। नदी के घटने और बढ़ने के साथ ही कटान तेज हो गई है। नदी अब तक एक घर को अपने आगोश में ले चुकी है। वहीं तेजी से कृषि योग्य भूमि को अपने आगोश में लेती जा रही है। इसके कटान से अब तक लगभग पांच एकड़ धान की फसल सेमरी गांव में काट चुकी है। देवारा खास राजा गाव में तीन से चार एकड़ जमीन कृषि योग्य काट चुकी है। घाघरा नदी के उत्तर गोरखपुर जनपद के दक्षिण बेलघाट ब्लॉक के सीमा पर आजमगढ़ का सेमरी गांव स्थित है। जहां पिछली बार मल्लाह बस्ती का अस्तित्व समाप्त हो गया और इस वर्ष पांच एकड़ धान की फसल काटकर खत्म कर दिया। घाघरा नदी जहां कृषि योग्य भूमि के अस्तित्व को समाप्त कर रही है वहीं आबादी की तरफ लगातार बढ़ती जा रही है।
सेमरी गांव के आराजी देवारा तिघरा बस्ती के विक्रम, सूरज, चंद्रकेश, हरिराम, श्रीराम, जयराम, रघुनाथ, उषा इसरावती आदि और आराजी पहाड़पुर बस्ती के विषय राजबहादुर, गोमती, लल्लन, राम कुमार, हरि मोहन, लालचंद आदि की जमीन घाघरा में विलीन हो गई। तिघरा बस्ती से तीन एकड़ और पहाड़पुर बस्ती से दो एकड़ जमीन घाघरा में विलीन हो चुकी है। घाघरा नदी के कटान से सेमरी गांव के आराजी देवारा तिघरा और आराजी पहाड़पुर में पांच एकड़ फसल नदी में कटकर विलीन हो गया है। सगड़ी तहसील के हरैया ब्लाक के देवारा खास राजा गांव के मुरारी पुरवा और त्रिलोकी पुरवा नई बस्ती से भी लगभग तीन एकड़ जमीन घाघरा में विलीन हो गई और आबादी की ओर बढ़ रही है। अब तक एक घर भी घाघरा में अपना अस्तित्व खो चुका है। घाघरा की लगातार कटान होने से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है।