अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संध्या चौधरी ने हत्या के मामले में दोषी पाए गए तीन अभियुक्तों को उम्र कैद की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर 12 हजार रुपया अर्थदंड भी लगाया। जबकि इसी मामले के चार अन्य आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
घटना रौनापार थाने के बघावर गांव की है। 12 मार्च 2000 को बघावर गांव के झिनक की लाश एक खेत में फेंकी मिली। इस मामले में मृतक के पिता झब्बर ने रौनापार थाने में सात लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे में झब्बर ने कहा था कि उसका लड़का झिनक घटना से लगभग चार वर्ष पूर्व गांव के ही मेवालाल की पत्नी सुराती को कहीं लेकर चला गया था। तब से मेवालाल उसके परिवार से रंजिश रखता था।
पांच मार्च 2000 की शाम झिनक अपने ड्यूबवेल पर गया और वापस नहीं लौटा। एक सप्ताह बाद उसकी लाश गांव के बाहर एक खेत में फेंकी हुई मिली। इस मामले में पुलिस विवेचना के बाद मेवालाल, सुराती, लाल बहादुर, शिवशंकर, लोकनाथ, हरिशंकर और शंकर के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
सत्र परीक्षण के दौरान इस मुकदमे की पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता राम मिलन यादव ने कुल पांच गवाहों को बतौर साक्षी पेश किया। अदालत ने आरोपित किए गए मेवालाल, लाल बहादुर और सुराती को दोषी पाते हुए सजा सुनाई। शिवशंकर, हरिशंकर, लोकनाथ और शंकर को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।