जिला अस्पताल की स्थापना भले ही मरीजों को नया जीवन देने के लिए किया गया है। लेकिन यहां डाक्टर और कर्मचारियों की मिली भगत से झूठी रिपोर्ट तैयार करने का गोरखधंधा चल रहा। दलालों की मदद से यह लोग उन लोगों की मेडिकल रिपोर्ट तैयार करते हैं। जिन्हें कोई चोट ही नहीं लगी रहती है। डीएम के निर्देश पर ऐसे तीन मामलों की जांच गुरुवार को गठित किए गए तीन डाक्टरों का पैनल किया।
यह लोग मिली भगत से झूठा मेडिकल बनाकर पुलिस की मिली भगत से विपक्षियों पर मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस उन्हें परेशान कर रही।
जिला अस्पताल सूत्रों की माने तो मारपीट जैसे मामलों में मनबढ़ पहले तो स्वयं विपक्षियों को मारपीटकर घायल कर देते हैं। बाद में रुपये के बल पर हड्डी टूटने और चोट लगने की झूठी रिपोर्ट तैयार करवाते हैं। ऐसे लोगों का एक्सरे रिपोर्ट एक माह बाद तैयार की जाती है।
डाक्टरों की मानें तो कहीं की भी हड्डी टूटी हो। करीब एक माह बाद वह जुड़ ही जाती है। ऐसे में डाक्टर के कहने पर अस्पताल के कर्मचारी संबंधित से अच्छीखासी रकम लेकर एक माह बाद एक्सरे करते हैं। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस केस दर्ज कर कार्रवाई का दवाब बनाती है।
ऐसे तीन मामलों की शिकायत डीएम सुहास एलवाई से की गई। डीएम के निर्देश पर गुरुवार को जिला अस्पताल के डाक्टर अभिषेक सिंह, डा. आरआर कुशवाहा और एमरजेंसी के ईएमओ डा. अजीजी का पैनल गठित कर तीन लोगों को मेडिकल पुन: करवाया गया। इसमें जीयनपुर कोतवाली के बनरहिया गांव निवासी अभय सिंह, महराजगंज थाने के जमीरपुर गांव निवासी सुशीला देवी पत्नी पतिराम और रौनापार थाने के सलाउद्दीन पट्टी गांव निवासी सबियाबानो पत्नी इसहाक का नाम शामिल है। दूसरी तरफ इस प्रकार की घटना के बाद चर्चाओं का बाजार गरम हो गया। लोगों की मानें तो यदि इस मामले की सही तरीके से जांच करवाई जाएगी तो अस्पताल और पुलिस विभाग के कई लोगों की गर्दन नप सकती है।