बरदह थाने के नरवें गांव निवासी सिरबल बिंद की हत्या गंवई राजनीति का परिणाम था। मनबढ़ों के हमले से घायल सिरबल की पत्नी, बेटा और बेटियां जिला अस्पताल से शनिवार की शाम तक घर चली आईं ताकि सिरबल का अंतिम संस्कार कर सकें। घर पर ही डाक्टर बुलाकर घायलों का इलाज किया जा रहा है। घटना के दूसरे दिन रविवार को भी परिवार में चूल्हा नहीं जला। एहतियातन दो सिपाही तैनात किए गए हैं।
करीब चार हजार आबादी वाले इस गांव में सबसे अधिक दलित इसके बाद क्षत्रिय, राजभर, बिंद और यादव बिरादरी के लोग रहते हैं। गांव से निकली पक्की सड़क सिसवारा होते हुए मुक्तीपुर बाजार जाती है। इसी सड़क से करीब 40 मीटर पीछे सिरबल का मकान है। अपने दरवाजे से पांच मीटर छोड़ वह 20 फुट लंबा और 12 फुट चौड़ा कमरा बनवा रहा था। शेष उसकी जमीन खाली पड़ी थी। इसी खाली पड़ी जमीन से करीब पांच फुट पश्चिम तरफ मंतलाल राजभर का मकान है। उसका सहन सड़क की तरफ है। मंतलाल के मकान के पूरब सिरबल की जमीन की तरफ पांच फुट खाली जमीन है। जिसे वह कब्जा करना चाहता था और दो वर्ष पूर्व सिरबल की सहमति पर मड़ई डाल ली थी। सिरबल जब अपने मकान का निर्माण शुरू किया तो गंवई राजनीति हावी होने लगी। कुछ लोग सिरबल की तरफ से तो कुछ लोग मंतलाल की तरफ से खड़े हो गए। चूंकि सिरबल अपनी जगह पर सही था। इसलिए वह निर्भीक था। मंतलाल की नीयत में खोट थी और वह विवाद करना चाहता था। परिवार और गांव के कुछ अन्य लोगों का साथ आग में घी डालने का काम किया और वह सिरबल की हत्या कर दी गई।