महराजगंज थाना क्षेत्र के भीलमपुर गांव निवासी विजय प्रताप सिंह की हत्या की गुत्थी घटना के आठ दिन बाद रविवार को सुलझाते हुए पुलिस ने हत्यारोपी को गिरफ्तार कर लिया।
साथ ही हत्या में प्रयुक्त तमंचा और कारतूस भी मौके से बरामद किया। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह विजय प्रताप की हत्या नहीं करता तो वह उसे ही गोली मार देता।
क्योंकि विजय आरोपी की हत्या करने की योजना तैयार कर उसे घर से अपने साथ लेकर निकला था।
पुलिस लाइन परिसर में रविवार को घटना का खुलासा करते हुए एएसपी ग्रामीण सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने बताया कि भीलमपुर गांव निवासी विजय प्रताप और चंद्रविजय सिंह गहरे दोस्त थे।
ज्यादातर दोनों साथ-साथ रहते थे। विजय अपनी आदतों के चलते चंद्र विजय के परिवार की महिलाओं पर गलत नजर रखने लगा था।
इसे लेकर दोनों के बीच विवाद भी हुआ और चंद्रविजय ने घर के कुछ अन्य लड़कों के साथ मिलकर विजय प्रताप को पीटा भी था। एएसपी ने बताया कि विजय इसका बदला लेने के लिए एक फरवरी को चंद्रविजय के घर पहुंचा और भूसा दिलाने के बहाने उसे बाइक पर बैठाकर घर से चल दिया।
दोनों ने रास्ते में शराब पी। विजय मित्र चंद्रविजय सिंह को लेकर महराजगंज थाने के गोनापुर गांव की सिवान में पहुंचा और उसे गोली मारने के लिए तमंचा सटा दिया।
विरोध करते हुए चंद्र विजय ने तमंचा विजय प्रताप से छीन लिया। इस छीनाझपटी में गोली विजय को जा लगी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद चंद्रविजय तमंचा मौके पर फेंक कर फरार हो गया। वह अपने घर पर ही रह रहा था।
एएसपी ने बताया कि घटना के बाद खुलासे के लिए थानाध्यक्ष महराजगंज चंद्रभास्कर द्विवेदी को लगाया गया था।
जांच पड़ताल के दौरान पुलिस को चंद्रविजय पर शक हुआ। हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने पूरा घटनाक्रम बता दिया।मालूम हो कि दो फरवरी की सुबह गोंनापुर गांव के सिवान में विजय प्रताप सिंह की हत्या कर लाश फेंकी मिली थी। जेब से मिले सिमकार्ड के जरिए उसकी पहचान हुई थी।