बिजली की खपत कम करने की योजना के तहत सरकार ने आमजन को सस्ते दर पर उपलब्ध कराने के लिए एक निजी कंपनी को एलईडी बल्ब मुहैया कराए थे। बाद में करीब 62 लाख रुपये के बल्ब प्राइवेट कंपनी के कर्मचारियों ने गायब कर दिए। इसका खुलासा होने पर कंपनी के मैनेजर ने पांच लोगों के विरुद्ध नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस अमानत में खयानत का केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
बता दें कि बिजली की चोरी रोकने और बिजली बचाने के लिए सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं। क्योंकि ज्यादातर लोग घरों में अधिक वाट के बल्ब लगाकर उसे दिन और रात बिना मतलब के जलाकर बिजली खर्च करते हैं। इस पर रोक नहीं लग पा रही थी। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उपभोक्ताओं को सस्ते दर पर एलईडी बल्ब देने का निश्चिय किया। इसका ठेका एक मशहूर कंपनी को दे दिया गया।
योजना के तहत कंपनी के कर्मचारियों ने रानी की सराय कस्बा निवासी गुलाब सेठ के मकान में एलईडी बल्ब का गोदाम बनाया था। यहीं से एलईडी बल्ब की सप्लाई की जाती थी। कंपनी ने इस काम की जिम्मेदारी दिल्ली सुभाषनगर रोड निवासी जितेंद्र कुमार, कार्तिकेय, अजय तिवारी आदि को दी थी। बाद में इस गोदाम से 27650 एलईडी बल्ब गायब हो गए। इसमें कर्मचारियों की मिलीभगत बताई जा रही है।
योजना के तहत यह बल्ब कंपनी की तरफ से किसी को भी आईडी प्रूफ दिखाने पर महज सौ रुपये में दिया जा रहा है। जबकि बाजार में इसकी कीमत 200 से 225 रुपये तक है। ऐसे में इन बल्बों की कीमत 62 लाख 21 हजार 250 रुपये आंकी जा रही है। बीते शुक्रवार को कंपनी के मैनेजर उमेश मौर्य पुत्र जगमोहन रानी की सराय पहुंचे। रिकार्डों का मिलान करने पर यह गोलमाल उजागर हुआ। शनिवार को उमेश ने रानी की सराय थाने में जितेंद्र सहित पांच लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई। सीओ नगर डा. केकेे सरोज ने बताया कि घटना की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच एसओ रानी की सराय मिथिलेश मिश्रा कर रहे हैं।