तीन मई की रात खुदादादपुर में आटो चालक की पिटाई के बाद दो समुदायों में हुए खूनी संघर्ष को लेकर शनिवार की शाम गांव में फिर हिंसा की चिनगारी भड़क गई। एक दलित परिवार में आए युवक की बदमाश समझ कर दूसरे समुदाय के लोगों द्वारा पिटाई को लेकर दोनों पक्षों के लोग आमने सामने आ गए। दोनों पक्षों में मारपीट हुई। इसी दौरान लोगों ने पीड़ित युवक की बाइक में आग लगा दी, उसके घर में आग लगा दिया। पथराव भी हुआ। इसमें कई लोग घायल हुए हैं। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति पर काबू पाने के लिए न सिर्फ लाठियां भांजी बल्कि हवाई फायरिंग भी की और आंसू गैस छोड़ा। जानकारी होते ही जिलाधिकारी सुहास एलवाई, एसपी दयानंद मिश्रा कई थानों की फोर्स, पीएसी लेकर पहुंचे। तनाव को देखते हुए गांव में कई थानों की पुलिस और पीएसी की टुकड़ी बुलाई गई है। अधिकारी माहौल शांत कराने के प्रयास में जुटे रहे।
बता दें कि खुदादादपुर गांव निवासी मुसाफिर राम आटो चलाता है। तीन मई की रात पड़ोसी गांव फरीदाबाद के कुछ लोगों से उसकी कहासुनी हुई थी। उस दौरान भी मारपीट और पथराव हुआ था। इस मामले में मुसाफिर ने थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई है। तभी से यहां अदावत की आग सुलग रही थी। शनिवार की शाम मुसाफिर के घर एक रिश्तेदार आया। उसे देखकर फरीदाबाद और संजरपुर के कुछ लोग मुसाफिर के घर पहुंच गए। आरोप है कि रिश्तेदार को बदमाश समझकर पीटने लगे और उसकी बाइक छीन ली और मारपीट की। हमलावरों ने मुसाफिर के घर और उसके रिश्तेदार की बाइक में आग लगा दी। इसकी जानकारी दलित बस्ती के लोगों को हुई तो वे आक्रोशित होकर लाठी-डंडे से लैस होकर हमलावरों को को दौड़ा लिया। जबकि हमलावरों के समर्थन में उनके गांव के लोग भी खड़े हो गए। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच पथराव शुरू हो गया। इसमें कई लोग घायल हुए हैं लेकिन घायलों का नाम नहीं पता चल सका है। मामला दो समुदायों का होने के कारण तनाव फैल गया। इसकी जानकारी होने पर कुछ ही देर में वहां डीएम सुहास एलवाई, एसपी दयानंद मिश्रा, एसपी सिटी डा. विपिन ताडा कई थानों की फोर्स लेकर पहुंच गए। पुलिस ने घेरे बंदी कर गांव से एक किलोमीटर पहले ही रास्ता ब्लाक कर दिया। पत्रकारों को भी मौके पर नहीं जाने दिया गया। तनाव पर काबू पाने के लिए पुलिस ने लाठियां भांजी और आंसू गैस के गोले दागे। रात होने की वजह से उपद्रवियों पर इसका कोई असर नहीं हुआ। समाचार लिखे जाने तक मौके पर भारी फोर्स के साथ अधिकारी डटे रहे। लोग स्थिति पर नियंत्रण पाने का हर संभव प्रयास कर रहे थे।