थाना क्षेत्र के बाबू की खजुरी गांव स्थित कब्रिस्तान में रविवार की सुबह एक समुदाय के व्यक्ति का शव दफनाने के विवाद में दो समुदाय के लोग आमने-सामने हो गए। दोनों समुदायों के लोगों ने कब्रिस्तान पर अपना हक जताया। मामला तनावपूर्ण होने की सूचना पर एसडीएम मेंहनगर, सीओ लालगंज कई थानों की फोर्स लेकर मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों को मेंहनगर थाने पर बुलाया, जहां चार चार घंटे तक पंचायत हुई और सहमति बनने के बाद शव दफनाया गया। एसडीएम ने एक माह के भीतर विवाद सुलझाने का आश्वासन दिया है।
मेंहनगर थाना क्षेत्र के बासूपुर गांव निवासी हबीबुल्ला (95) की शनिवार की रात मौत हो गई। रविवार की सुबह परिवार के लोग हबीबुल्ला की लाश दफनाने के लिए बाबू की खजुरी स्थित कब्रिस्तान ले गए और गड्ढा खोदने लगे। तभी बाबू की खजुरी गांव के तमाम दलित वहां पहुंच गए और संबंधित स्थान पर अपनी बिरादरी का कब्रिस्तान बताया। इस बात को लेकर दोनों समुदायों के लोग आमने-सामने हो गए। बात आगे बढ़ते देख ग्राम प्रधान इंद्रजीत सिंह ने एसडीएम मेंहनगर को सूचना दी।
कुछ ही देर में वहां एसडीएम कपिलदेव यादव, सीओ लालगंज एसपी तोमर, प्रभारी निरीक्षक मेंहनगर सारनाथ सिंह के अलावा कोतवाल देवगांव मुनीष चौहान, एसओ तरवां वहां पहुंच गए। अधिकारी दोनों पक्षों के पांच-पांच लोगों को लेकर आए, जहां दोनों के बीच करीब चार घंटे तक पंचायत हुई। एसडीएम कपिलदेव यादव ने लोगों को शांत कराया। दोनों पक्षों की सहमति के बाद शव को वहीं पर कब्रिस्तान में दफना दिया गया।
एसडीएम कपिलदेव यादव ने बताया कि बाबू की खजुरी में दलित और मुस्लिम कब्रिस्तान सटा हुआ है। इसलिए इनमें अक्सर विवाद होता रहता है। नायब तहसील को निर्देश दिया गया है कि वह एक माह के भीतर दोनों कब्रिस्तान की जमीन का पैमाइश कर उसे अलग करवा दें। कब्रिस्तान की बाउंड्री बनवा दी जाए ताकि इनका विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो जाए।