आजमगढ़। नोटबंदी के दो साल पूरे होने के बाद भी सरकार ने कैशलेस व्यवस्था को लागू करने का जो सपना देखा था आज वह परवान चढ़ता दिखाई नहीं देता। क्योंकि जनपद नाममात्र लोग ही इस सुविधा का लाभ ले रहे हैं। व्यापारी जहां इसे असफल बता रहे हैं वहीं एलडीएम इसके लिए अशिक्षा को भी एक बड़ा कारण बता रहे हैं।
दो साल पूर्व जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की तो देश में नोट का अकाल हो गया। तब उन्होंने डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देते हुए कैशलेस व्यवस्था शुरू की। ताकि लोग अपने मोबाइल के जरिए बिना पैसे के भी भुगतान कर सकें। काफी तेजी से इस पर कार्य हुआ लेकिन समय आगे बढ़ने के साथ डिजिटल इंडिया मात्र सपना ही बनकर रह गया। आज भी जनपद में लगभग 80 से 85 प्रतिशत लोग ही डिजिटल पेमेंट के जरिए खरीदारी करते हैं। इसका सबसे ज्यादा उपयोग आज का युवा वर्ग कर रहा है।
लेकिन आज भी युवा वर्ग के अलावा अन्य वर्ग के लोग डिजिटल पेमेंट पर विश्वास नहीं करते हैं। डिजिटल पेमेंट की सबसे बड़ी समस्या नेटवर्क की आती है। कभी-कभी तो ऐसी स्थिति हो जाती है सामान खरीदने के बाद जब पेमेंट की बात आती है तो पता चलता है कि नेटवर्क गायब है। ऐसी स्थिति में या तो वह सामान छोड़कर चला जाता है या काफी देर तक काउंटर पर खड़ा होकर इंतजार करता है। दूसरे इस पर लगने वाला चार्ज दुकानदारों पर भी भारी पड़ता है। जिसके कारण दुुकानदार भी इसे अपनाने से बचना चाहता है। वैसे अभी जनपद में बहुत से लोग ऐसे हैं जो एंड्राएड मोबाइल का इश्तेमाल नहीं करते हैं।
आजमगढ़। संस्कार माल के प्रोपराइटर आशुतोष रूंगटा का कहना है कि डिजिटल पेमेंट में कई समस्याएं आती है। कभी नेटवर्क नहीं रहता, कभी कार्ड की लिमिट परेशान करती है। सबसे ज्यादा इस पर लगने वाले चार्ज से परेशानी होती है। सरकार को इसे कम करना चाहिए। फिर भी हमारे यहां आने वाले ग्राहकों में 20 से 25 प्रतिशत लोग डिजिटल पेमेंट करते हैं।
मेडिकल हाल संचालक रंजन राय ने कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह से असफल हुई है। क्योंकि बहुत से लोग ऐसे हैं जो अभी तक इंटरनेट का इश्तेमाल नहीं करते। क्योंकि उनके लिए यह टेढ़ी खीर साबित होता है। दूसरे नेटवर्क की प्राब्लम, मशील का सर्विस चार्ज, पेमेंट पर चार्ज कटना आदि इसकी राह की सबसे बड़ी परेशानी हैं। फिर भी हमारे यहां एक से दो प्रतिशत लोग ऐसे आते हैं जो दवा का डिजिटल पेमेंट करते हैं।
उपभोक्ताओं ने नेटवर्किंग और प्रशिक्षण न होना बताया वजह
आजमगढ़। नीरज कुमार ने बताया कि डिजिटल पेमेंट करने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या नेटवर्किंग की है। हमारी दुकान है कई बार ऐसा हुआ कि हम सामान लेने पहुंचे हैं। लेने के बाद नेटवर्क न होने के कारण उधार लगाना पड़ा।
अविनाश यादव ने बताया कि डिजिटल पेमेंट की सबसे बड़ी बाधा इंटरनेट का ज्ञान न होना है। आज भी युवा वर्ग तो इसका इश्तेमाल कर लेता है। लेकिन जो अन्य लोग वह इसका प्रयोग करने से हिचकते हैं। सरकार को इसे लागू करने से पहले सबको प्रशिक्षण देना चाहिए था।
जिले में कितने लोग पीओएस मशीन इश्तेमाल करते हैं यह बताना अभी मुश्किल है। वैसे में किसी ने पीओएस मशीन वापस की हो ऐसी जानकारी मुझे नहीं है। लेकिन युवाओं का डिजिटल बैंकिंग की ओर अच्छा खासा रूझान है। जो लोग नहीं करते वह अशिक्षा के कारण है। दूसरे नेटवर्क भी इस राह में बहुत बड़ा रोड़ा है।
संतोष कुमार, एलडीएम यूबीआई