आजमगढ़। चार सदस्यीय पैनल ने डीएवी प्राथमिक अनुभाग में हुई नियुक्ति प्रक्रिया की जांच रिपोर्ट डीआईओएस को सौंप दी गई है। जांच में दोनों शिक्षकों की नियुक्ति को अवैध माना गया है। नियुक्ति के समय दोनों शिक्षकों की टीईटी की वैद्यता भी समाप्त हो गई थी। इसके साथ ही डीएवी प्राथमिक अनुभाग में नियुक्ति के लिए शासन से किसी पद की सृजन नहीं किया था। पैनल को छह शिक्षकों की पूरी चयन प्रक्रिया नियम विरुद्ध मिली है। अनियमित चयन के लिए तत्कालीन डीआईओएस और पटल सहायक दोषी पाए गए हैं। इनके ऊपर कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है। डीएवी प्राइमरी अनुभाग में नियुक्त दो सहायक अध्यापक कृष्ण प्रताप सिंह और सतीश चंद्र की अवैध नियुक्ति की आरोप लगाते हुए उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रामजन्म सिंह ने इसकी शिकायत कमिश्नर और जिलाधिकारी से दो फरवरी को की थी। शिकायत के बाद डीआईओएस ने दोनों शिक्षकों को वेतन जारी करने के आदेश को वापस ले लिया था। डीएम ने मामले की जांच के लिए 17 मार्च को चार सदस्यी पैनल का गठन किया था। इसमें एडीएम वित्त एवं राजस्व, डीएमओ, बीएसए और एडीएसटीओ सुनील सिंह को शामिल किया था। जांच के दौरान पाया गया कि डीएवी प्राइमरी अनुभाग में तत्कालीन डीआईओएस चंद्रजीत यादव ने निदेशालय और शासन की बिना अनुमति के ही सहायक अध्यापकों के चयन की अनुमति प्रदान कर दी। अनुमति के समय विद्यालय में 22 छात्र पंजीकृत थे। आरटीई एक्ट के तहत इन पर दो सहायक अध्यापकों के चयन की अनुमति बनती है। विद्यालय में तब दो शिक्षक पहले से कार्यरत थे। इस स्थिति में छह पदों पर नियुक्ति की अनुमति विधि विरुद्ध थी। इसके साथ ही कृष्ण प्रताप सिंह और सतीश चंद्र की ओर से वर्ष 2011 में उत्तीर्ण की गई टीईटी की मान्यता भी नियुक्ति के समय खत्म हो चुकी थी। इस स्थिति में जेडी की ओर से 14 दिसंबर 2017 को दोनों शिक्षकों के चयन के लिए दी गई अनुमन्यता भी नियम संगत नहीं है। इसलिए उक्त दोनों शिक्षकों का चयन निष्प्रभावी योग्य है। चयन प्रक्रिया में तथ्य गोपन करने और संपूर्ण पत्रावली पेश न करने के लिए पटल सहायक योगेंद्र नाथ सिंह भी दोषी पाए गए हैं। वहीं, तत्कालीन डीआईओएस चंद्रजीत यादव को निजी स्वार्थ के लिए प्रबंधक को नियम विरुद्ध अनुमति देने का दोषी पाया गया है। जांच टीम मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है। जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी डीआईओएस डॉ. वीके शर्मा को जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
निजी स्वार्थ के लिए दी अनुमति
आजमगढ़। शिकातकर्ता ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन डीआईओएस चंद्रजीत यादव ने अवैधानिक रूप से नियमों का उल्लंघन कर सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के लिए छह पदों की अनुमति दी थी। इसमें अंशुमति वर्मा, कृष्ण प्रताप सिंह, मनीषा सिंह, आकांक्षा चंद्रा, सतीष चंद्र, शशीकला यादव का चयन प्रबंधक की ओर से कर दिया गया था। इसमें आंकाक्षा चंद्रा तत्कालीन डीआईओएस चंद्रजीत यादव की पुत्री हैं। उनकी नियुक्ति के स्वदार्थ में ही चयन की अनुमति दी गई थी। इसमें चार अभ्यर्थियों के चयन को अर्हता नहीं होने के कारण निरस्त कर दिया गया था।
जांच के आदेश को छुपा गए पटल सहायक
आजमगढ़। 2018 में हुई शिकायत से पहले भी तत्कालीन डीआईओएस वीपी सिंह के समय में नियुक्ति प्रकरण के संबंध में शिक्षा निदेशक से मार्ग दर्शन और आदेश मांगा गया था। इस प्रकरण में दो पूर्व जिलाधिकारी भी जांच के आदेश दे चुके थे, लेकिन पटल सहायक योगेंद्र ने इसे दबा लिया। चयन प्रक्रिया चलती रही और इसकी जानकारी वर्तमान डीआईओएस को नहीं दी गई। इससे दोनों शिक्षकों के चयन को मंजूरी मिल गई और वेतन जारी करने का आदेश भी हो गया। मामले में पटल सहायक और तत्कालीन डीआईओएस चंद्रजीत यादव के बीच दुरभिसंधि रही है।
पैनल की जांच रिपोर्ट मिल चुकी है। इसी आधार पर कोर्ट में जवाब दाखिल किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी ठहराए गए लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई उचित स्तर से जल्द कराई जाएगी।
डॉ. वीके शर्मा, डीआईओएस