आजमगढ़। एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में भीम सेना की ओर से भारत बंद का एलान किया गया था। संगठन का जनपद में कोई खास प्रभाव न होने से पुलिस-प्रशासन की ओर से वैसी तैयारी नहीं की गई, जैसी होनी चाहिए थे। वहीं, विरोध प्रदर्शन को अंदरखाने बसपा समेत अन्य विपक्षियों की समर्थन से अचानक से भारी मात्रा में भीड़ सड़कों पर आई। प्रदर्शचारियों को नियंत्रित करने में पुलिस-प्रशासन से पसीने छूटने लगे। इन्हें संभालने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। सगड़ी बवाल भी इसी का नतीजा रहा।
एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज होते ही गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोक लगा दी गई है। इसके विरोघ में भीम आर्मी की ओर से भारत बंद का एलान किया गया था। संगठन का जनपद में कोई खास प्रभाव नहीं होने से सोमवार सुबह तक पुलिस-प्रशासन ने विरोध-प्रदर्शन को हल्के में लिया। विरोध प्रदर्शन को अंदरखाने बसपा समेत अन्य विपक्षियों की समर्थन से अचानक से भारी मात्रा में भीड़ सड़कों पर आ गई। पहले छतवारा में जाम लगाने की सूचना पर मुख्य राजस्व अधिकारी आलोक वर्मा, एसपी सिटी सुभाष गंगवार के साथ मौके पर पहुंचे। वहां लोगों को समझा रहे थे कि पता चला कि शहर के बवाली मोड़ पर जाम लगा दिया गया है। टीम दौड़ कर यहां पहुंची और लोगों को समझाना शुरू किया। किसी तरह समझा कर जाम खुलवाया तो प्रदर्शनकारी फिर जुलूस की शक्ल में कलक्ट्रेट पहुंच गए। टीम दौड़ कर फिर यहां पहुंची। पूरे दिन पुलिस और प्रशासन की टीम प्रदर्शनकारियों के पीछे-पीछे दौड़ती रही। हालांकि टीम की सक्रियता के कारण यहां कोई अप्रिय घटना नहीं घटी।
सगड़ी में नहीं तैयार थी पुलिस
आजमगढ़। विरोध-प्रदर्शन की गंभीरता का आंकलन नहीं होने से सगड़ी में पुलिस तैयार नहीं थी। कम संख्या होने के बाद भी उन्होंने तहसील गेट के सामने जाम लगा रहे प्रदर्शनकारियों को हटाना शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस एक प्रदर्शनकारी को पकड़ कर हटा रही थी कि प्रदर्शकारियों ने समझा की गिरप्तारी हो रही है। इसी ने बवाल का रूप ले लिया। शुरू में पुलिस के कम होने पर प्रदर्शनकारियों तोड़फोड़, आगजनी और बवाल के साथ ही पुलिस को भी जमकर पीटा। लगभग छह राउंड फायरिंग और अन्य फोर्स के पहुंचने के बाद पुलिस बवालियों को खदेड़ने में कामयाब हो पाई।