आजमगढ़। एक ही जिले में प्रशासन के दो रूप देखने को मिल रहे हैं। फर्जी प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वाले बेसिक शिक्षकों पर कमिश्नर और जिलाधिकारी के निर्देश के बाद रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है। वहीं, एक माह पहले हुई अनुदानित मदरसों की जांच में 16 शिक्षक-कर्मचारी फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी करते पाए गए थे। काफी हीलाहवाली के बाद विभाग की ओर से इन्हें सिर्फ वेतन रोक कर छोड़ दिया गया। प्रशासन के इस दो रंग से बेसिक शिक्षकों में आक्रोश है।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सहजानंद की शिकायत पर बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक पद पर हुई भर्ती की जांच चल रहा है। जांच अभी तक पांच ऐसे शिक्षकों को पकड़ा गया है जो फर्जी अंक पत्र के आधार पर नौकरी करते पकड़े गए थे। 100 से अधिक और शिक्षक भी चिहिन्त हैं, जिन्होंने नौकरी पाने के लिए किसी न किसी रूप में फर्जीवाड़ा किया है। इनके खिलाफ भी जांच आखिरी दौर में हैं। उपरोक्त पांच शिक्षकों के खिलाफ कमिश्नर के निर्देश पर जिलाधिकारी रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दे चुके हैं। कुछ पर एफआईआर हो चुकी है और कुछ के खिलाफ तहरीर दी गई है।
वहीं, जून-जुलाई माह में 20 अनुदानित मदरसों की जांच गठित टीम से कराई गई थी। जांच के दौरान 16 शिक्षकों-कर्मचारियों की नियुक्ति में कोई न कोई गड़बड़ी मिली थी। किसी ने दस्तावेज सही नहीं लगाए थे, किसी ने अपनी उम्र छिपाई थी, तो किसी ने चयन समिति का अध्यक्ष होते अपने पूरे कुनबे की नियुक्ति मदरसे में कर दी थी। फर्जीवाड़ा करने वालों की साठगांठ इतनी बड़ी थी कि जिलाधिकारी की रिपोर्ट के बाद भी रजिस्ट्रार अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कार्यालय से 26 जुलाई को सिर्फ आठ लोगों का वेतन रोकते हुए मदरसों के लिए ग्रांट जारी कर दी गई। जिलाधिकारी की ओर से इस पर नाराजगी जताई गई तो 28 जुलाई को रजिस्ट्रार अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कार्यालय से छह और शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगा दी गई। इसके बाद भी आदेश में कहा गया कि ये वेतन रजिस्ट्रार की अनुमति के बाद जारी हो सकते हैं। इसके बाद फर्जीवाड़ा करने वालों 16 शिक्षकों-कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। एक ही तरह के आरोप के बाद बेसिक शिक्षकों पर रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद रिकवरी की कार्रवाई हो सकती है तो मदरसों पर प्रशासन की ओर से की जा रही ये मेहरबानी समझ से परे है। इसको लेकर बेसिक शिक्षकों में भी आक्रोश देखा जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि प्रशासन की ओर से कार्रवाई के नाम पर दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। शिक्षकों का ये आक्रोश कभी भी फूट सकता है।
मदरसों में नियुक्ति के नाम पर किए गए फर्जीवाड़े का मामला संज्ञान में हैं। इसकी रिपोर्ट भी संबंधित विभाग को भेजी गई थी। इसमें आगे क्या कार्रवाई की गई इसकी जानकारी के बाद मामले में विभागीय कार्रवाई कराई जाएगी।
चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी
दोनों विभागों में फर्जीवाड़ा एक तरह का है तो कार्रवाई भी प्रशासन को एक तरह की करनी चाहिए। यदि कार्रवाई में भेदभाव किया गया तो संगठन आवाज उठाएगा।
जितेंद्र राय, जिला मंत्री प्राथमिक शिक्षक संघ