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सरकारी जमीन को फर्जीवाड़ा कर बेचा

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आजमगढ़। देवगांव कोतवाली क्षेत्र के रेतवां चंद्रभानपुर गांव में लाखों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को अभिलेखों में हेराफेरी कर बेच दिया गया। अब मनबढ़ उक्त जमीन पर अवैध निर्माण कर कब्जा कर रहे हैं। शुक्रवार को गांव के रविशंकर तिवारी की शिकायत पर मंडलायुक्त के रविंद्र नायक ने एसडीएम लालगंज को मामले की जांच कर बैनामे के निरस्तीकरण और राजस्वकर्मी सहित अन्य दोषियों के विरुद्ध जांच कर कार्रवाई करवाने का आदेश दिया है।
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पीड़ित रविशंकर तिवारी का आरोप है कि उनके गांव में आबादी से सटा दो बीघा से अधिक खलिहान की जमीन है। यह जमीन वर्ष 1975 में गांव के एक व्यक्ति को पट्टे के रुप में आवंटित हो गई। गांव वालों के विरोध के बाद 1976 में उसे खारिज कर संबंधित को इस जमीन के बदले में दूसरी जमीन आवंटित कर दी गई। पट्टे से खारिज होने के बाद उक्त पट्टे की जमीन को ग्राम समाज के खाते में दर्ज कर दिया गया। राजस्वकर्मियों की लापरवाही से अभिलेखों में दुरुस्तीकरण नहीं हो सका। उधर जिस व्यक्ति को पट्टा हुआ था। उसने पट्टे की जमीन को बेच दिया। चूंकि पहले पट्टे के रुप में मिली जमीन के निरस्तीकरण की कार्रवाई पूरी न होने की वजह से उसे भी बेच दिया। मामला संज्ञान में आने पर तात्कालीन डीएम रणवीर प्रसाद से शिकायत की गई तो तात्कालीन तहसीलदार लालगंज मनोज तिवारी ने जमीन को खारिज कर ग्राम समाज के खाते में दर्ज करने के लिए एडीएम प्रशासन के यहां रिपोर्ट भेज दी। यह मामला एडीएम के न्यायालय में चल रहा था। इसीबीच जुलाई 2017 को फाइल गोपनीय तरीके से एडीएम प्रशासन के न्यायालय से एडीएम वित्त/राजस्व के न्यायालय में भेज दिया गया। एडीएम ने सरकारी कागजात और तहसीलदार की रिपोर्ट को दरकिनार कर उसे फर्जीवाड़ा करने वालों के पक्ष में आदेश कर दिया। जिसकी वजह से अवैध निर्माण किया जा रहा। मंडलायुक्त के रविंद्र नायक ने एसडीएम लालगंज को निर्देश दिया है कि जमीन के अभिलेखों की जांच कर पट्टे के निरस्तीकरण की कार्रवाई करें। दोषी राजस्वकर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई और अन्य के विरुद्ध थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जाए। एसडीएम लालगंज अभय कुमार मिश्रा ने कहा कि निर्माण कार्य रोकवा दिया गया है। दोषियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश लेखपाल को दिया गया है। जांच की जा रही है।
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