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सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में हुई सुनील की हत्या

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आजमगढ़। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव स्थित मां काली मंदिर पर शुक्रवार की रात भंडारे में सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में मनबढ़ों ने ताबड़तोड़ गोली मारकर सुनील की हत्या कर दी। वहीं ग्रामीण बीच-बचाव करने की बजाय भाग खड़े हुए। घटनाक्रम से लग रहा था कि हत्या को पूरी योजना बनाकर अंजाम दिया गया। सुनील के भाई अरविंद की तहरीर पर गांव के मनीष सिंह, प्रमोद सिंह, विनोद और अवनीश सिंह के विरुद्ध नामजद रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही।
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ग्रामीणों के मुताबिक शुक्रवार को ही मंदिर पर दो दिनी रामायण का पाठ शुरू हुआ था। रामायण पाठ समाप्ति के बाद भंडारा होना था। लेकिन कार्यक्रम बदलकर पहले दिन ही भंडारा रखा गया। गांव के कई लोग सब्जी सहित अन्य सामान खरीदने अहरौला बाजार गए। इनके साथ आरोपी मनीष और विनोद भी थे। अन्य लोग सामान खरीदने लगे, जबकि विनोद और मनीष थाने में चले गए। करीब एक घंटे तक भीतर किसी से बातचीत करने के बाद लौटे। भोजन का क्रम शुरू होने पर सुनील सिंह भंडारे में पहुंचे जबकि उनका छोटा भाई अरविंद पहले से मौजूद था। सुनील नशे में था। भोजन के दौरान किसी बात से नाराज सुनील जोर-जोर से शोर मचाने लगा। आरोपी विनोद उसे शांत कराने पहुंचा। इस दौरान सुनील और विनोद में हाथापाई होने लगी। भाई के साथ विवाद होने पर सुनील के समर्थन में छोटा भाई अरविंद भी पहुंच गया। यह देख मनीष ने उसे पकड़कर दूर खदेड़ दिया। तबतक विनोद ने अपने अवैध असलहे से सुनील के सीने में सटाकर ताबड़तोड़ छह राउंड फायर किए। दो गोली मिस हो गई, चार गोली उसके सीने के पार हो गई। पीछे खड़े मनीष सिंह ने भी दो गोलियां मारी।
सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में गोलियां तड़तड़ाने से वहां मौजूद लोग भाग खड़े हुए। सुनील की हत्या के बाद बदमाशों ने उसके भाई को दौड़ाया, लेकिन वह भाग निकला। दो भाइयों में बड़ा सुनील चार बेटियों का पिता था। वह मुर्गी फार्म का मालिक था। घटना के संबंध में सुनील के भाई अरविंद ने रिपोर्ट दर्ज कराई।
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फैसले की घड़ी नजदीक आने से बढ़ रही थी बेचैनी
गंभीर आरोप के मामले में 18 अक्तूबर को आना है फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
आजमगढ़। पुरानी रंजिश में सुनील सिंह उर्फ गुड्डू की हत्या के साथ ही चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। गांववालों के मुताबिक सुनील की तरफ से पट्टीदार मनीष सिंह और उसके भाई अवनीश सिंह पर दर्ज कराए गए एक गंभीर मकदमे की सुनवाई कोर्ट में पूरी हो गई है। इस मामले में 18 अक्तूबर को फैसला सुनाया जाना है। फैसले की तीथि नजदीक आने से आरोपियों की बेचैनी बढ़ गई थी। इसी बौखलाहट में आरोपियों ने घटना को अंजाम दिया।
गांव वालों के मुताबिक वर्ष 2016 में सुनील सिंह ने अहरौला थाने में रिपोर्ट दर्ज करा कर मनीष सिंह और उसके भाई अवनीश को आरोपी बनाया था। इस मामले में 18 अक्तूबर को फैसला आना था। जबकि सुनील के भाई अरविंद के अपहरण के मामले में मनीष सिंह और विनोद सिंह को आरोपित किया गया है। इस मुकदमे की सुनवाई चल रही है। गंभीर आरोप में विपक्षी मनीष और उसके भाई को लग रहा था कि अदालत इसमें उन्हें कहीं उम्रकैद की सजा न सुना दे। यदि इस मामले में सजा सुनाने पर अपहरण वाले मामले में भी यह लोग नहीं बच सकेंगे। ऐसे में योजना बनाकर सुनील के हत्या की कर दी गई।

कोट
रंजिशन इस घटना को अंजाम दिया गया। अरविंद सिंह की तहरीर के आधार पर मनीष सिंह, प्रमोद सिंह, विनोद सिंह और अवनीश सिंह के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। - नरेंद्र प्रताप सिंह, एसपी ग्रामीण
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पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
आजमगढ़। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में स्थित मां काली मंदिर पर शुक्रवार की रात भंडारे के दौरान ताबड़तोड़ छह गोलियां मारकर की गई सुनील सिंह की हत्या के बाद लोग पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाने लगे हैं। गांव वालों के मुताबिक पुलिस भलिभांति जानती है कि मनीष और विनोद बदमाश हैं। यह दोनों हाल ही में जेल से छूटकर आए थे। बावजूद इसके शुक्रवार की दोपहर सब्जी खरीदने के बहाने दोनों आरोपी अहरौला थाने में करीब एक घंटे तक बैठकर किसी से बातचीत की। ऐसे में गांव के लोग पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे।
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