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100 से अधिक मौत फिर भी काला कारोबार जारी

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आजमगढ़। जहरीली शराब पीने से हुई बड़ी घटनाओं में अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। कई के आंखों की रौशनी भी जा चुकी है। बावजूद जिले में धड़ल्ले से अवैध शराब का काला कारोबार चल रहा है। इस धंधे से कई सफेदपोश भी जुड़े हुए हैं। इसका खुलासा पुलिस की गिरफ्तारियों में हो चुका है।
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जहरीली शराब पीने से हुई घटनाओं पर गौर करें तो सात जुलाई 2017 को रौनापार थाना क्षेत्र के केवटहिया, जीयनपुर कोतवाली के अजमतगढ़ में 30 लोगों की मौत हो चुकी है। चार लोग अपने आंखों की रोशनी गंवा चुके हैं। इस घटना से पूर्व अक्तूबर 2013 में मुबारकपुर थाने के केरमा सहित आसपास के गांव में जहरीली शराब पीने से 56 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना में भी तीन लोगों के आंख की रोशनी चली गई थी। जबकि वर्ष 2009 में बरदह थाना क्षेत्र के इरनी गांव में जहरीली शराब पीने से जहां 10 लोगों की मौत हुई थी और चार के आंखों की रोशनी चली गई थी। प्रशासन की लापरवाही का परिणाम रहा कि अवैध शराब का कारोबार सगड़ी तहसील क्षेत्र के ज्यादातर गांव में कुटीर उद्योग का रुप ले चुका था। वर्ष 2017 में हुई घटना के बाद सीएम आदित्यनाथ योगी ने अवैध शराब के कारोबार की जड़ समाप्त करने का आदेश दिया। सीएम के आदेश पर काफी हद तक सक्रिय हुई पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई बड़े कारोबारियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार होने वालों में बसपा के पूर्व विधायक सुरेंद्र मिश्रा भी शामिल हैं। इनकी कप्तानगंज थाना क्षेत्र में बंद पड़े महिला महाविद्यालय में अवैध शराब की फैक्ट्री चल रही थी। जबकि मुबारकपुर और बरदह थाना क्षेत्र में हुई घटनाओं के लिए जिम्मेदारों में कुछ सफेदपोशों के नाम भी उजागर हुए थे। ऐसे लोगों का चेहरा बेनकाब करने का दावा भी हुआ था, लेकिन समय के साथ-साथ मामले को दबा दिया गया। ऐसे में अवैध शराब की बिक्री में संलिप्तता पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है।
अवैध शराब बिक्री की रोकथाम के लिए आबकारी विभाग की विशेष जिम्मेदारी बनती है। - कमलेश बहादुर, एसपी सिटी

दुकानों के व्यवस्थापन में व्यस्तता की वजह से विभाग के ज्यादातर अधिकारी और कर्मचारी इसमें व्यस्त हैं। ऐसे में अवैध कारोबारियों पर नजर रखना पुलिस की जिम्मेदारी है। आबकारी विभाग अपने स्तर से अवैध कारोबारियों पर नजर रखते हुए कार्रवाई कर रहा है। - ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, जिला आबकारी अधिकारी
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