आजमगढ़। मलेशिया रोजी रोटी की तलाश में पहुंचे जिले के पांच युवक एजेंटों के चंगुल में फंस गए हैं। मंगलवार को उन्होंने घर वापसी के लिए मलेशिया स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया। वहीं उनके परिजन अपनों की घर वापसी के लिए पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर गुहार लगाने के लिए पहुंचे। सिधारी थाना क्षेत्र के हैदराबाद निवासी अरमान अहमद पुत्र मकसूद अहमद, बेलागर गांव निवासी रमेश चौहान पुत्र सामू चौहान, निजामाबाद थाना क्षेत्र के चकमाली गांव निवासी प्रदीप सिंह पुत्र विक्रमा सिंह, चंद्रकेश पाल पुत्र गिरधारी पाल, सरायमीर क्षेत्र के निवासी संदीप मलेशिया में फंसे हुए है। परिजनों का आरोप है कि गंभीरपुर थाना क्षेत्र के कमरावां गांव निवासी नैयर पुत्र इसरार जिले के बेरोजगार युवकों को रोजगार दिलाने का लालच देकर उन्हें विदेश भेजने का काम करता है। सिधारी क्षेत्र के छतवारा हैदराबाद बाजार में ट्रैवेल्स की दुकान भी चलाता है। उसने मलेशिया के एक कंपनी में चालीस हजार रुपये के वेतन पर नौकरी के नाम पर वीजा दिलाने का झांसा देकर किसी से एक लाख तो किसी से अस्सी हजार रुपये ले लिया। रुपये लेने के बाद उसने सभी युवकों को टूरिस्ट वीजा देकर मलेशिया भेज दिया। अरमान के पिता मकबूल अहमद सभी पांचों युवकों के साथ अमृतसर एयरपोर्ट से 17 अक्तूबर को मलेशिया पहुंचे। मलेशिया पहुंचने पर पांचों युवकों को जानकारी हुई कि उन्हें टूरिस्ट वीजा पर भेज दिया गया है। जब उन्होंने एजेंट से संपर्क किया तो उसने मलेशिया में रह रहे अपने एक साथी का नंबर दिया। उसके साथी के नंबर पर जब युवकों ने संपर्क किया तो वह उनके पास आया और उन्हें एक कंपनी में ले जाकर नौकरी दिलवा दी। उक्त कंपनी में बारह घंटे काम करने पर उन्हें सिर्फ चार घंटे काम का ही पैसा मिलता है। बाकी पैसा एजेंट का साथी कंपनी से ले लेता है। पूछने पर वह कहता है कि जो एजेंट तुम लोगों को भेजा है उसके यहां उसका पांच लाख रुपये बाकी है। परिजनों का आरोप है कि पांचों युवकों का पासपोर्ट व वीजा भी एजेंट के साथी ने अपने पास रख लिया है। पांचों युवकों को वहां पर प्रताड़ित किया जा रहा है और उन्हें भोजन भी नहीं दिया जा रहा है। परिजनों ने पुलिस अधीक्षक से मिलकर उन्हें फंसे युवकों की घर वापसी की गुहार लगाई।