आजमगढ़। जेल में निरुद्ध धर्मेंद्र पासी से मोबाइल छीनने के विवाद में जिस बंदी रक्षक मानसिंह यादव को 22 जनवरी की रात बदमाशों ने गोली मारी थी। उसकी हालत में अब सुधार हो रहा है। घटना के बाद से छुट्टी पर चल रहे मानसिंह यादव रविवार को दवा लेने आए थे। इस दौरान एसपी से मिलकर सुरक्षा की गुहार लगाई। एसपी ने उसे शस्त्र लाइसेंस देने का भरोसा दिया। बंदी रक्षक ने बताया कि वह वर्ष 2015 से ही बदमाशों के निशाने पर था। क्योंकि उसने अपने कार्यकाल के दौरान किसी बंदी को फोन आदि नहीं चलाने दिया। छापेमारी के दौरान मोबाइल आदि बरामद कराने में अधिकारियों की मदद करता था।
एसपी के समक्ष मानसिंह घटना का जिक्र करते हुए बताया कि 22 जनवरी की शाम वह अपने साथी मनीष शर्मा के साथ ड्यूटी कर रहा था। बैरक नंबर एक सी में निरुद्ध धर्मेंद्र पासी फोन पर बात करते हुए मनीष शर्मा से हालचाल पूछने लगा। इस पर मनीष ने कहा कि एक तो तुम फोन पर बात कर रहे हो, दूसरे हमसे हालचाल पूछ रहे हो। इस पर मनीष ने धर्मेंद्र का मोबाइल छीन लिया। मोबाइल मनीष के पास था। चूंकि 25 मई 2015 की रात जेल में छापेमारी के दौरान बरामद हुए 54 मोबाइल, सात इयरफोन, और 11 सिमकार्ड मानसिंह की ही निशानदेही पर बरामद हुए थे। इस पर तत्कालीन एसपी आकाश कुलहरि ने उसे प्रशस्तिपत्र दिलवाया था। तभी से मानसिंह अपराधियों के निशाने पर था। मानसिंह ने बताया कि 22 जनवरी की रात साढ़े आठ बजे वह सोया था। तभी एक बाइक पर सवार दो बदमाश पहुंचे, जिसमें मुकेश राजभर उससे बात कर रहा था। जबकि दूसरा बदमाश बाइक पर चेहरा दूसरी तरफ करके खड़ा था। मानसिंह यादव मुकेश को तो पहचान गया लेकिन गोली लगने से वह घायल हो गया, जिसकी वजह से पुलिस को नहीं बता सका। मुकेश की पहचान उसने अखबार में छपी उसकी फोटो से की। मानसिंह ने एसपी से मांग की कि दूसरा बदमाश अभी भी फरार है, जिससे उसका परिवार काफी भयभीत है। वह भी ड्यूटी करने से डर रहा है। ऐसे में स्वयं की रक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस दिलाने की मांग की। ताकि विकट परिस्थिति में वह अपनी रक्षा कर सके।