आजमगढ़। सितंबर 2008 में दिल्ली में हुए बाटला एनकाउंटर की घटना में सरायमीर थाने के संजरपुर गांव निवासी आतिफ और साजिद मार दिए गए। जबकि बड़ा साजिद, मिर्जा शहनवाज, खालिद, असदुल्ला उर्फ हड्डी, आरिज उर्फ जुनैद खान, शहजाद आदि फरार हो गए। इन फरार आरोपियों पर एनआई द्वारा दस-दस लाख रुपये का इनाम घोषित करते हुए तलाश में जुट गई। जबकि इन युवकों को निर्दोष बताते हुए इनके हक की लड़ाई लडने के लिए एक संगठन का गठन कर दिया गया। वर्ष 2010 में यूपी एटीएस की टीम द्वारा शहजाद के घर छापेमारी कर उसे गिरफ्तार करने के बाद मुस्लिम संगठनों को लेकर एक स्वर से विरोध करते हुए न्यायिक जांच की मांग की थी । इसी घटना के बाद जिले के माथे पर बहुत बड़ा कलंक आतंकवाद की नर्सरी के रूप में बयानबाजी शुरू हो गई। राजनीतिक माहौर गरमाने पर केंद्र की सरकार डैमेज कंट्रोल करने में जुट गई। साथ ही कांग्रेस के तात्कालीन राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्गविजय सिंह, बुखारी सहित तमाम लोग आकर फरार संदिग्धों के घर वालों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। सपा के गढ़ में कांग्रेस की धमक होने से उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया था। वहीं एनआईए, यूपी एटीएम सहित अन्य सुरक्षा एजेंसियां फरार संदिग्धों की तलाश में जुट गई। जिसका परिणाम बीच-बीच में इनकी गिरफ्तारी होने पर मिलता रहा। देश विरोधी गतिविधियों में शामिल गिरफ्तार असदुल्लाह उर्फ हड्डी उर्फ डेनियल को जहां हैदराबाद की निचली अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। वहीं कई आरोपी अभी भी फरार हैं। जिनकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है।