सगड़ी। लगभग एक हजार एकड़ में फैला तहसील क्षेत्र स्थित ताल सलोना जनपद ही नहीं प्रदेश में विख्यात है। यहां अवैध रूप से ताल की जमीन पर कब्जे का मामला प्रकाश में आया। प्रधान की शिकायत पर डीएम की जांच में फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। 45 साल पहले तत्कालीन लेखपाल ने इसे अपने भाई के नाम भूमिधरी दर्ज कर दिया था। जमीन को वापस ताल के नाम करने के साथ ही कार्रवाई भी संभावित है। लाटघाट में सरयू नदी के तट से लेकर मऊ जनपद स्थित शहरोज तक ताल फैला हुआ है। ये सैकड़ों गांव की आजीविका का भी स्रोत है। अजमतगढ़ में कैनाल निर्मित है। विदेशी साइबेरियन पक्षियों का ठंड के मौसम में बसेरा बनता है। ताल अपने क्षेत्रफल से सिकुड़ता जा रहा है। ग्राम सभा अतरतकच्छा ताल सलोना के प्रधान वसीम ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि कई वर्ष पूर्व लेखपाल हरिश्चंद यादव जो वर्ष 2014 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं ने अपने भाई रामधारी पुत्र पल्टू निवासी पूरा बाल नारायणपुरा और रामबली पुत्र जीता निवासी जमुआ सागर के नाम पर भूखंड 638/10000 व 35/0.32 7 एकड़ को 1386 से 1391 फसली वर्ष में फर्जी तरीके से नया खाता 435ब रामधारी पुत्र पलटू के नाम से अंकित करा दिया। भूखंण 315/0.850 व 696/8/0.910 और 490/0.450 तीनों गाटों में 2.10 एकड़ रामबली पुत्र जीता के नाम 349ब फर्जी अंकित कराया। ये फसली वर्ष 1422 से 1427 तक खाता संख्या 405 व 435 भी फर्जी तरीके से विक्रय की जा रही है। प्रधान के ने तहसीलदार न्यायालय में आपत्ति दाखिल की है। जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी आदेश पर सगड़ी तहसील दार अरविंद सिंह ने जांच की। जमीन में फर्जीवाड़ा पकड़ में आने पर रिपोर्ट बनाकर उप जिलाधिकारी को प्रेषित कर दी। पुन: लगभग 10 एकड़ भूखंड को ताल सलोना के नाम से दर्ज किया जाएगा। एसडीएम दिनेश मिश्रा ने बताया कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत ताल सलोना के नाम से भूखंड को अंकित कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी।