आजमगढ़। पीड़ितों को न्याय दिलाने और हर फरियादी की रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई का महज सिर्फ ढिंढोरा पीटा जा रहा है। असल हकीकत कुछ और है। ताजा उदाहरण शनिवार को एसपी दफ्तर में देखने को मिला। जहां आठ वर्षीय घायल बेटे के साथ महिला न्याय के लिए भटकती नजर आई। गांव के मनबढ़ों की पिटाई से घायल बेटे का इलाज करने से जहां सीएचसी अहरौला के डाक्टर ने इंकार कर दिया। वहीं अहरौला थाने की पुलिस ने भी मुकदमा लिखने से मना कर दिया। मामला संज्ञान में आने पर एसपी ग्रामीण ने एसओ अहरौला को फटकार लगाते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया है।
पीड़ित महिला अनीता देवी पत्नी गब्बर अहरौला थाना क्षेत्र के लेदौरा गांव की रहने वाली है। पीड़िता के मुताबिक शुक्रवार की शाम उसका आठ वर्षीय बेटा विश्वजीत बकरी चराने गया था। इस दौरान वह सिवान में स्थित एक गुलर के पेड़ से पत्ती तोड़कर बकरियों को खिलाने लगा। यह बात उसके गांव के एक युवक को नागवार गुजरी और उसने बेटे को मारपीट कर घायल कर दिया। विश्वजीत के सिर में किसी नुकीले चीज से चोट लग गई। परिवार के लोगों ने थाने पर सूचना दी। इसके बाद खून से लथपथ विश्वजीत को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अहरौला पहुंचे। अनीता का आरोप है कि मनबढ़ के प्रभाव में आकर डाक्टर ने इलाज करने से इंकार कर दिया। लोगों की सलाह पर वो जब अहरौला थाने पर मुकदमा दर्ज कराना चाहा तो केस लिखने की बजाय उसे डांटकर भगा दिया गया। प्राइवेट डाक्टर के यहां इलाज कराने के बाद अनिता अपने बेटे को लेकर एसपी आफिस पहुंची और एसपी ग्रामीण से मिलकर गुहार लगाई। एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह एसओ अहरौला को फटकार लगाते हुए केस दर्ज कर कार्रवाई का निर्देश दिया।