हत्या के दो मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी की शुक्रवार को हृदयाघात होने से जिला अस्पताल में मौत हो गई। वह कई दिनों से बीमार भी चल रहा था। शुक्रवार को सीने में तेज दर्द होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उधर, शनिवार को जिला अस्पताल पहुंचे बंदी के दोनों बेटों ने जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। मेंहनगर थाना क्षेत्र के गंजोर गांव निवासी राजेंद्र सिंह (45) पुत्र स्व. हरिद्वार पांच भाइयों में चौथे नंबर पर था। वह सेना का जवान था।
वर्ष 1985 में बांस की खुटी को लेकर पट्टीदार प्रह्लाद और ओमप्रकाश से मारपीट हुई। जिसमें घायल दोनों लोगों की मौत हो गई। घटना के संबंध में प्रह्लाद के घर वालों ने राजेंद्र और उसके भाइयों को नामजद करते हुए थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वर्ष 1995 में अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पांचों भाइयों को आजीवन कारावास की सजा दे दी। तभी से सभी जेल में सजा काट रहे थे। जेल में ही बीमारी के चलते राजेंद्र के दो भाई विजई और राममूरत की मौत हो चुकी है।
जबकि राजेंद्र की शुक्रवार को हृदयाघात के चलते मौत हो गई। अब उसके बड़े भाई जंगबहादुर और छोटा नागेंद्र ही बचे हैं। दोनों जेल में हैं। उधर राजेंद् के मौत की सूचना पर उसके दोनों बेटे संजय और दिलीप शनिवार को जिला अस्पताल पहुंचे। इन दोनों ने राजेंद्र के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप जेल प्रशासन पर लगाया। जेलर एसके सिंह ने बताया कि राजेंद्र सिंह काफी दिनों से बीमार चल रहा था। उसे जेल के अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज कराया जा रहा था। शुक्रवार को राजेंद्र के सीने में तेज दर्द होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।