जिले के कई ग्राम पंचायतों का निर्माण कार्य अधूरा है। ऐसे में गांव की सरकार घरों से चल रही है। ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर इधर से उधर चक्कर लगा रहे हैं। जबकि जिम्मेदारी लाररवाही बरत रहे हैं। जिले में 1811 ग्राम पंचायतें हैं। ग्रामीणों को आय, जाति प्रमाण पत्र और दूसरी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए गांवों में मिनी सचिवालय का निर्माण कराया जा रहा है। अब तक करीब 1400 ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय बन चुके हैं। अन्य में कहीं कार्य चल रहे तो कहीं बजट के अभाव में अधूरे पड़े हैं। शासन की मंशा के अनुरूप इसी भवन में पंचायत की बैठकें होनी हैं और ग्राम पंचायत अधिकारी भी बैठेंगे। पंचायत के दस्तावेजों के सुरक्षित रखरखाव, कंप्यूटर आदि की उपलब्धता रहेगी। इसके लिए सरकार लाखों रुपये खर्च करके गांव में सचिवालयों का निर्माण करा रही है लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण अभी तक कई विकास खंडों के गांवों में मिनी सचिवालय नहीं बन सके हैं। वहीं ग्राम प्रधान अपने घर या कहीं अन्य स्थानों पर कंप्यूटर रखकर प्राइवेट व्यक्ति से कार्य करा रहे हैं। लाटघाट : हरैया ब्लाक के शनिचारा दान शनिचरा में मिनी सचिवालय निर्माणधीन है। लेकिन पिछले कई माह से काम भी बंद है। इसका कारण बजट की समस्या बताई जा रही है। रानी की सराय : विकास खंड रानी की सराय ब्लाक के साकीपुर गांव में पंचायत भवन का निर्माण चल रहा था। गुणवत्ताहीन निर्माण होने की शिकायत हो गई। जिसमें जांच हुई तो मानक के विपरीत पाया गया। जिसे लेकर डीपीआरओ ने कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे। अब तक निर्माण अभी पूरा नहीं हो सका। सरायमीर : मिर्जापुर ब्लाक के बीनापारा गांव में बन रहा पंचायत भवन का निर्माण अधूरा है। छत की ढलाई तो हो गई लेकिन फिनिशिंग बाकी है। अमिलो : विकास खंड सठियांव के भितरी बसौद्घा ग्राम पंचायत में मिनी सचिवालय का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। डीपीआरओ श्रीकांत दर्वे ने बताया कि सचिवालय का निर्माण कराया जा रहा है। इसके लिए ग्रामप्रधानों को भी निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही निर्माण पूर्ण कर लिया जाएगा। सभी ग्राम पंचायतों से मिनी सचिवालयों की वर्तमान समय की स्थिति मांगी गई है।