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आक्सीजन की कमी से कांस्टेबल के मौत मामले की होगी जांच

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आजमगढ़। जिला अस्पताल में रविवार की सुबह आक्सीजन की कमी के चलते पीएसी कांस्टेबल की मौत मामले की जांच होगी। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद अस्पताल प्रशासन प्रकरण को लेकर जाग गया है और एसआईसी ने दो डॉक्टरों की टीम आक्सीजन की कमी के बाबत जांच के लिए गठित कर दी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदारों के प्रति कार्रवाई की जाएगी।
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शनिवार की शाम छह बजे से रविवार की सुबह 10 बजे तक जिला अस्पताल में कहीं भी आक्सीजन मौजूद नहीं था। रविवार की सुबह मेंहनगर थाना क्षेत्र के गोलाबाजार निवासी व पीएसी गोरखपुर में बतौर कांस्टेबल तैनात लियाकत अली की आक्सीजन के आभाव में मौत हो गई थी। परिजन उन्हें गंभीर हाल में लेकर सुबह छह बजे जिला अस्पताल पहुंचे थे। इमरजेंसी में तैनात डॉ. मनोज ने हालत देखने के बाद कहा कि इन्हें आक्सीजन की जरूरत है लेकिन यहां आक्सीजन उपलब्ध नहीं है। इस पर उन्होंने मरीज को आईसोलेशन वार्ड में भेज दिया ताकि आक्सीजन मिल सके और कोरोना की जांच भी हो जाए। वहां भी आक्सीजन नहीं मिला लेकिन कोरोना की जांच हो गई। जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इस पर आईसोलेशन से उन्हें आईसीयू में भेज दिया गया। यहां भी आक्सीजन नहीं उपलब्ध था और मरीज की हालत खराब हो रही थी। नर्स ने परिजनों से कहा कि बचाना है तो विनायक अस्पताल ले जाए। इसके बाद परिजन मरीज को लेकर विनायक अस्पताल भागे जहां डॉक्टर ने भर्ती नही किया तो दूसरे प्राइवेट अस्पताल जा रहे थे कि रास्ते में ही कांस्टेबल की मौत हो गई। इसके बाद परिजन पुलिस को सूचना दिए तो पुलिस शव को पीएम के लिए मर्चरी ले आयी। जहां मृतक के पुत्र अमन ने अस्पताल में आक्सीजन न होने के चलते पिता की मौत होने का आरोप लगाया। अमर उजाला ने सोमवार के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिस पर अस्पताल प्रशासन सोमवार को हरकत में आया और आक्सीजन की कमी से मरीज की मौत मामले की जांच को लेकर दो सदस्यी कमेटी एसआईसी डॉ. एसकेजी सिंह ने गठित कर दी। एसआईसी ने बताया कि जांच कमेटी में डॉ. हरिओम श्रीवास्तव व डॉ. एके सिंह को शामिल किया गया है। जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल में यूज होता है प्रतिमाह 130 सिलेंडर
आजमगढ़। जिला अस्पताल में सेंट्रलाइज आक्सीजन की व्यवस्था है। प्रत्येक वार्ड, इमरजेंसी, आईसीयू में पाइप लाइन के माध्यम से आक्सीजन की आपूर्ति की जाती है। आक्सीजन सिलेंडर एक स्थान पर लगाया जाता है और हर जगह आक्सीजन पहुंचता है। प्रति माह के आक्सीजन सिलेंडरों के खपत की बात की जाए तो 120 से 130 सिलेंडर प्रतिमाह जिला अस्पताल में खर्च होता है। 20 से 25 सिलेंडर शेष रहते ही आक्सीजन सिलेंडर वेंडर से मंगवा लिया जाता है। अभी बीते 19 अगस्त को ही वेंडर ने अस्पताल को 26 सिलेंडर उपलब्ध कराया था। बताया जाता है कि अस्पताल के कर्मचारी सिलेंडर का खर्च तो दिखाते है लेकिन उसका उपयोग कम किया जाता है। सूत्र तो यह भी बताते है कि यहां आक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी होती है और मरीजों को उपलब्ध कराने के लिए आए आक्सीजन सिलेंडरों को प्राइवेट अस्पतालों को बेच दिया जाता है। कायदे से प्रकरण की जांच हो जाए तो निश्चित तौर पर जिला अस्पताल में आक्सीजन सिलेंडर के प्रयोग को लेकर बड़ा खेल सामने आ सकता है।
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