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चार बंदी रक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृति

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आजमगढ़। शासन के निर्देश पर ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने वाले चार बंदीरक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई है। इसमें मऊ जिला जेल के तीन बंदी रक्षक और आजमगढ़ जेल का एक बंदी रक्षक शामिल है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक आजमगढ़ ने ये कार्रवाई की है।
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वरिष्ठ जेल अधीक्षक आजमगढ़ आरके मिश्रा के मुताबिक जिन बंदी रक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है, उसमें आजमगढ़ जिला जेल में तैनात बंदी रक्षक रविंद्र कुमार, मऊ जिला जेल के सतीश चंद्र उपाध्याय, कृष्णकांत तिवारी और सुरेश चंद उपाध्याय शामिल हैं। आरके मिश्रा के मुताबिक यह चारों बंदीरक्षकों ने अपने पूरी ड्यूटी काल के दौरान किसी भी महीने नियमित ड्यूटी नहीं की। ड्यूटी की थी तो उनकी संलिप्तता कहीं न कहीं जेल में निरुद्ध बदमाशों से पाई गई। इन बंदियों के कार्य का पूरा लेखाजोखा इन चार बंदीरक्षकों के चरित्र पुस्तिका में भी संबंधित अधिकारियों द्वारा अंकित किया गया है। चरित्र पुस्तिका सहित अन्य अभिलेखों को खंगालने पर पता चला कि इन चारों बंदीरक्षकों की वजह से विभाग का कोई भी कामकाज ढंग से नहीं हो पाया। विरोध करने पर इन लोगों ने अधिकारियों से भी दुर्व्यवहार किया। इसके लिए इन सभी बंदीरक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई। बता दें कि इस प्रकार के अधिकारी और कर्मचारियों की वजह से ही ना केवल जेल में दुर्व्यवस्था उत्पन्न हुई, बल्कि इनकी लापरवाही से अपराध का ग्राफ भी बढ़ गया। आलम यह है कि जेल में निरुद्ध बदमाश मिली भगत के चलते भीतर मोबाइल चलाते हुए लोगों को धमकी देकर रंगदारी मांगने, आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिलवाने आदि का काम करते थे। इन लापरवाह चार बंदीरक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई। जबकि अन्य के गतिविधियों की जांच की जा रही है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरके मिश्रा ने बताया कि शासन के निर्देश पर हुई जांच में लापरवाही पाए जाने पर चार बंदी रक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई। कार्रवाई कर इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई।
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