आजमगढ़। वर्तमान समय में किसानों को अभी उर्वरक की ज्यादा जरूरत नहीं है। वर्तमान में किसान धान की नर्सरी डाल रहे हैं। जिसके लिए वह एक दो किग्रा उर्वरक ही खरीद रहे हैं। उर्वरक की ज्यादा मांग न होने के कारण समितियों पर उर्वरक अधिक है। वहीं अगर जनपद में समितियों की स्थिति पर नजर डालें तो जितनी समितियां संचालित हो रही हैं। उससे अधिक डिफाल्टर हो चुकी है। जिसके कारण जरूरत के समय किसानों को दर बदर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। उन्हें बाजार से ऊंचे दामों पर उर्वरक की खरीद करनी पड़ती है।
लाटघाट प्रतिनिधि के अनुसार अजमतगढ और हरैया विकासखंड क्षेत्र के कई गांव की साधन सहकारी समितियां डिफाल्टर हो चुकी हैं। जिसके कारण किसानों को मजबूरी में बाजार से ब्लैक में डाई और यूरिया लेना पड़ता है। अजमतगढ़ विकास खंड में कुल 16 साधन सहकारी समितियां हैं। जिसमें 8 से 10 डिफाल्टर हैं।वहीं हरैया विकास खंड में कुल 17 साधन सहकारी समितियां है। जिसमें से 10 समितियां डिफाल्टर हैं। बाजार में डाई 1250 से 1300 रूपए और यूनिया 325 से 350 रुपये में मिल रही है। जबकि डाई का सरकारी रेट 1150 रुपये और यूरिया का 266.50 रुपये है। बिंद्राबाजार प्रतिनिधि के अनुसार मुहम्मदपुर विकास खंड में कुल आठ समितियां हैं। जिन पर खाद तो है लेकिन सात पर बीज उपलब्ध नहीं हैं। अहरौला प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में कई सहकारी समितियां तो निष्क्रिय हैं। हंसामतलूबपुर समिति के सचिव अरुण कुमार यादव ने बताया कि इस समिति पर मात्र गेहूं खरीद का स्वीकृत है। खाद व बीज का लाइसेंस निरस्त हो चुका है। सोसाइटी पर खाद बीज की उपलब्धता नहीं है। इसी प्रकार पारा मिश्रौली सहकारी समिति के सचिव सुधीर सिंह ने बताया कि सोसाइटी पर खाद और बीज की उपलब्धता नहीं है। खजूरी सहकारी समिति के सचिव अवधेश कुमार ने बताया खजूरी समित पर डाई और यूरिया और धान के बीज उपलब्ध हैं। मौजूदा समय में डाई 1150 रुपया और यूरिया 45 किलो की बोरी 270 में बेंची जा रही है। धान के बीज में यहां सांभा मंसूरी की उपलब्धता है।