सड़क हादसे में मोती लाल सिंह की मौत
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वह वर्तमान में गोरखपुर विश्वविद्यालय चौराहे के पास सरकारी आवास में रहते थे और मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय और जनता दर्शन का काम देखते थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे से लेकर उनके लखनऊ आने तक की व्यवस्थाओं पर उनकी नजर रहती थी। मंदिर में हर छोटी बड़ी घटना, लोगों की फरियाद सुनने और मुख्यमंत्री तक उनकी बात पहुंचाने का काम भी मोतीलाल सिंह देखते थे।
चार भाइयों में तीसरे नंबर के मोती लाल सिंह नायब तहसीलदार के रूप में प्रशासनिक सेवा में कार्य करते हुए चोरीचौरा, बांसगांव समेत कई तहसीलों में उपजिलाधिकारी के रूप में कार्य किए थे। वो नगर निगम गोरखपुर में अपर आयुक्त भी रहे। सीएम के पसंदीदा अधिकारियों में गिने जाने वाले मोतीलाल सिंह अपने पीछे पत्नी, दो पुत्रियों व एक पुत्र को छोड़ गए हैं।
बड़ी पुत्री और पुत्र आलोक सिंह की शादी हो चुकी है। छोटी पुत्री की भी शादी करनी है। पुत्र आलोक सिंह कस्टम विभाग में कार्यरत हैं। चार भाइयों, लक्ष्मी सिंह, जवाहिर सिंह, मोती सिंह, हीरा सिंह में अब हीरा सिंह ही जीवित बचे हैं, जिनकी बूढ़नपुर में इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान है।