चाइनीज विद्युत झालरों ने दीयों की बिक्री को ठंडा कर दिया। इतना ही नहीं निर्माण सामग्री महंगी होने से लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की ब्रिकी भी प्रभावित हुई है। इसे लेकर कुम्हारों के पेशानी पर बल पड़ गए हैं। वह अपने रोजी रोजगार के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
जिले में मिट्टी की कलाकारी के लिए प्रसिद्ध निजामाबाद कस्बे में शिल्कपकार साधारण दिये, स्टैंर्ड दिया, फैंसी दिया, सादा दिया, कटवर्क दिया, गणेश मटकी दिया, झुमर दिया, टी-लाइट होल्डर दीया, रोम लैंप दीया, पंचमुखी दीया, नारियल दीया, सेमई दीया, हाथी दीया, स्टैंडर्ड दीया सहित लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा बनाते हैं।
मिट्टी के दाम में बढ़ोत्तरी के कारण दीयोंऔर मूर्तियों के दाम में भारी उछाल आया है। वर्तमान में दीया और गणेश-लक्ष्मी प्रतिमा बनाने में प्रयुक्त होने वाली मिट्टी वर्तमान में 5600 रुपये ट्राली मिल रही है।
इसी तरह अन्य सामानों के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है। जिसके चलते जो मूर्तियों पहले 20 से 25 रुपये में बिकती थी, वहीं मूर्ति अब 60 से 80 रुपये में बिक रही है। तो दूसरी तरफ पिछले वर्ष सादादीया जो 15 रुपये दर्जन बिक रहा था, वह इस वर्ष 30 रुपये दर्जन है।
इसी प्रकार अन्य फैंसी दीयों की कीमत में भी दुगने का इजाफा हुआ है। बाजार में चायनीज की रंग-बिरंगी झालरों ने भी दीयों के कारोबार को बुरी तरह से प्रभावित किया है।
निजामाबाद कस्बे के सोहित प्रजापति और महेंद्र प्रजापति ने बताया कि लोग पुरानी संस्कृति को छोड़कर नई संस्कृति को अपनाते जा रहे हैं। इसका असर हम कुम्हारों की रोजी रोटी पर पड़ रहा है।
उनका कहना है कि एक समय ऐसा था कि उन्हें काम के लिए समय ही नहीं मिलता था आेर इस समय काम के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। कहा कि आने वाले समय में उनका व्यापार आैर चौपट हो जाएगा।