मंडल कारागार में मां के साथ निरुद्ध बच्चों की दशा की जांच के लिए बुधवार को शासन से राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य प्रेमा मिश्रा मय टीम जेल पहुंची। वहां उन्होंने बच्चों की मां से वार्ता की। वहीं प्रेमा मिश्र ने नगर क्षेत्र के दो प्राथमिक विद्यालयाें का भी निरीक्षण किया।
निरीक्षण कर दोपहर में 12 बजे के करीब निकली टीम की प्रभारी प्रेमा मिश्र ने बताया कि मंडल कारागार में मां के साथ कुल आठ बच्चे निरुद्ध हैं। जांच का उद्देश्य मां के साथ जेल में बंद बेगुनाह बच्चों को राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध की जा रही सुविधाएं मिल रही हैं कि नहीं।
बताया कि राज्य सरकार ने जेल में निरुद्ध बेगुनाह बच्चों को उत्तम शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्था उपलब्ध कराई है। जांच में पाया गया कि निरुद्ध बच्चों को अन्य मामलों में जेल में बंद पढ़ी लिखी लड़कियां पढ़ाने का काम करती है। इसके अलावा बच्चों को दूध और पौष्टिक अहार दिया जा रहा है। यहां सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त मिली। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाएगी।
इसके बाद प्रेमा मिश्र मय टीम एलवल मुहल्ला स्थित प्राथमिक और जूनियर विद्यालय की जांच करने के लिए चली गई। यहां सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त मिली, छात्रों की संख्या कम और शौचालय साफ न मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई। इस दौरान बीईओ पल्हनी सीमा गौतम मौजूद थी।
बलरामपुर संवाददाता के अनुसार प्रेमा मिश्रा शाम को जिला अस्पताल पहुंची। यहां मौजूद बच्चों के वार्ड का निरीक्षण की। इस दौरान वार्ड में भर्ती वृद्ध के बारे में उन्होंने डाक्टरों से जानकारी हासिल की। प्रेमा मिश्रा ने मुख्य चिकित्साधीक्षक से कुपोषण वार्ड के बारे में जानकारी हासिल की। एफआईसी ने प्रेमा मिश्रा से अस्पताल की सबसे बड़ी समस्या रेडियोलाजिस्ट की कमी के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि वह अपने स्तर पर शिकायत को दूर कराएंगी। इस दौरान काफी संख्या में लोगों की मौजूदगी अस्पताल में रही।