जिले में 2706 परिषदीय संचालित हो रहे थे। इसमें 1724 प्राथमिक विद्यालय, 458 उच्च प्राथमिक व 524 कंपोजिट विद्यालय संचालित हो रहे थें। शासन के निर्देश के बाद जिले में करीब 151 विद्यालयों का विलय कर दिया गया।
परिषदीय विद्यालयों की दशा सुधारने के लिए सरकार इनका कायाकल्प करने में जुटी है। व्यवस्थाएं हाईटेक करने के बाद भी जिले में एक हजार से ज्यादा विद्यालयों में जमीन पर बैठकर बच्चे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। गर्मी व बारिश के दिनों में तो किसी तरह काम चल जाता है, लेकिन ठंड में बच्चों का बुरा हाल हो जाता है।
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जिले में 2706 परिषदीय संचालित हो रहे थे। इसमें 1724 प्राथमिक विद्यालय, 458 उच्च प्राथमिक व 524 कंपोजिट विद्यालय संचालित हो रहे थें। शासन के निर्देश के बाद जिले में करीब 151 विद्यालयों का विलय कर दिया गया। अब जिले में 2555 विद्यालय कुल संचालित हो रहे हैं। इनमें करीब ढाई लाख बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
मगर वर्तमान समय में परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था बेपटरी है। निरीक्षण के लिए अफसरों की फौज होने के बावजूद शिक्षक समय से स्कूल नहीं पहुंच रहे है। सत्र के छह माह बीतने के कगार पर है मगर अभी भी कई स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों को ड्रेस तक नहीं मिल सकी है।
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अधिकतर स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। विभागीय आंकड़ों को देखा जाए तो 1533 विद्यालयों में बेंच और डेस्क की व्यवस्था हो गई है लेकिन 1022 विद्यालयों में अभी तक नहीं हो सकी है। ऐसे में मेज पर बैठकर पढ़ाई करना इन स्कूलों के नौनिहालों के लिए किसी सपने से कम नही हैं।
शिक्षा क्षेत्र मिर्जापुर के प्राथमिक विद्यालय सरायमीर में बच्चे फर्नीचर की व्यवस्था न होने से टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं। बच्चों को फर्श पर बैठने में समस्याएं होती है। शिक्षा क्षेत्र अहरौला के प्राथमिक विद्यालय युधिष्ठिर पट्टी में भी व्यवस्थाएं बदहाल हैं। यहां कायाकल्प के तहत कार्य तो हुए लेकिन फर्नीचर की व्यवस्था नहीं हो सकी। ऐसे में बच्चे टाटपट्टी पर बैठकर पठन-पाठन कर रहे हैं।
बच्चों को टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। इसे देखते हुए फर्नीचर की व्यवस्था करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही फर्नीचर की व्यवस्था की जाएगी। -राजीव कुमार पाठक, बीएसए आजमगढ़