नगर के कालीनगंज क्षेत्र से होकर हथिया गांव में जाने के लिए शासन ने पुल का निर्माण करा दिया। पीडब्ल्यूडी ने पुल को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए सड़क सुरक्षा बांध को काट दिया लेकिन नदी के पानी को शहर में घुसने से रोकने की कोई व्यवस्था नहीं की। ऐसे में अगर तमसा नदी का जलस्तर बढ़ता है तो शहर को बाढ़ से बचाना मुश्किल होगा।
बताते चलें कि नगर से सटे हथिया गांव के लोगों को आजादी के बाद से शहर में आने के लिए नाव ही एक मात्र सहारा था, जो बरसात के दिनों में बंद हो जाता था। तब ग्रामीणों को लगभग आठ से नौ किमी की दूरी शहर पहुंचने के लिए तय करनी पड़ती थी। ग्रामीण काफी दिनों से तमसा पर पुल बनाने की मांग कर रहे थे। वनमंत्री दुर्गा प्रसाद यादव के प्रयास से यह पुल बनकर तैयार हुआ। पुल को बनाने के बाद इसे मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए पीडब्ल्यूडी ने उस बांध को काट दिया, जिसका निर्माण तमसा के पानी को शहर में घुसने से रोकने के लिए किया गया था। फिलहाल पुल को मुख्य मार्ग से जोड़ दिया गया।
ग्रामीणों का आवागमन भी शुरू हो गया लेकिन शहर की सुरक्षा खतरे में पड़ गई क्योंकि जो बांध मुख्य मार्ग से लगभग सात फीट ऊपर था। अब वह मुख्य मार्ग के लेबल आ गया है। पीडब्ल्यूडी ने अभी तक तमसा के जल को शहर में प्रवेश करने से रोकने की कोई व्यवस्था नहीं की है। जबकि इस मार्ग के अगल-बगल लोगों ने गुमटी रखकर दूकानें लगाना शुरू कर दी हैं। आज हालात यह है कि अगर तमसा का पानी अपनी पेटी से बाहर आया तो वह सीधे शहर में प्रवेश करेगा। उधर, सगड़ी क्षेत्र में घाघरा में आई बाढ़ से कई गांव के लोग प्रभावित हैं।
यह कार्य हमारा नहीं पीडब्ल्यूडी का है। हमारा जिम्मा पुल बनाने का था, जो हमने बना दिया। वैसे हाल ही में निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पीडब्ल्यूडी को इसकी व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। - एनके तिवारी, प्रोजेक्ट मैनेजर राज्य सेतु निर्माण निगम
हम नदी की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। मुख्य मार्ग के बगल में बने रेगुलेटर से लेकर नदी तक पाइप लगाने का कार्य किया जा रहा है। जो दो-तीन में पूरा हो जाएगा। इसके पूरा होने के बाद हम शहर में पानी न घुसे इसकी व्यवस्था करेंगे। - अमिनेश कुमार, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी