जनपद के ऐतिहासिक धरोहरों में एक शेरशाह सूरी द्वारा बनवाया गया शाही पुल आज उपेक्षा के कारण अपना अस्तित्व खोने की कगार पर पहुंच गया है। पुल पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित होने के बाद भी भारी वाहन धड़ल्ले से पुल से आवागमन करते हैं।
वैसे तो जनपद में कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं। इनमें से ज्यादातर धरोहरें आज उपेक्षित होने के कारण अपना अस्तित्व खोने की कगार पर पहुंच गई हैं। इनमें से नगर के हरबंशपुर क्षेत्र स्थित तमसा नदी पर बना मुगलकालीन शाही पुल भी शामिल है। पुल के जर्जर होने के कारण कई वर्ष पूर्व प्रशासन ने पुल से भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया। प्रतिबंध लगने के बाद पीडब्ल्यूडी द्वारा पुल के दोनों तरफ पोल लगाकर अवरोध बनाया गया ताकि बड़ी गाड़ियां इस पुल से होकर न गुजर सकें। लेकिन कुछ दिनों बाद ही यह अवरोध गायब हो गया।
इसके बाद एक बार फिर पुल के दोनों तरफ अवरोध लगाया गया। लेकिन वह भी गायब हो गया। आज पुल से छोटी गाड़ियों के साथ ही भारी वाहन भी धड़ल्ले से आवागमन करते हैं। वहीं पुल का रख रखाव ठीक ढ़ंग से न होने के कारण पुल की दावारों में बरगद और पीपल के पेड़ उग आए हैं। जो इसकी जड़ों का कमजोर कर रहे हैं। अगर समय रहते इस पेड़ों को काटा न गया और पुल से भारी वाहनों का प्रवेश नहीं रोका गया तो वह दिन दूर नहीं जब पुल का अस्तित्व ही समाप्त हो जाए।
पुल को बचाने की कवायद शुरू हो चुकी है। इसके लिए बगल में एक नए पुल का निर्माण किया जाएगा। जिसके लिए शासन से धन स्वीकृत हो चुका है। जल्द ही इस पर कार्य शुरू होगा। - सुहास एलवाई, जिलाधिकारी