सरायमीर। शहीदाने करबला के चेहल्लुम का मरकजी व ऐतिहासिक जुलूस मंगलवार की सुबह चौक स्थित इमामबाड़ा तस्कीने जैनब से मजलिस के बाद ताबूत, अलम, ताजिया व जुलजनाह के साथ निकला। अपने पुराने रास्तों से होता हुआ जुलूस खरेवां स्थित सदर इमामबाड़ा पहुंचा। यहां करबला के किया तो अजादारों की आंखों से आंसू निकल पड़े।
पहली मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मासूम असगर साहब ने कहा कि इंसान इमाम हुसैन की जिंदगी और उनकी तालीमात को सामने रखकर हक व बातिल के बीच फर्क कर सकता है। मुख्य चौक पर तकरीर करते हुए डा. सैयद कमर अब्बास ने कहा कि इमाम हुसैन की अजादारी हमें यह पैगाम देती है कि इंसान अमल को अंजाम दे और खुद को गुनाहों से बचाए। मौलाना इरफान अब्बास ने रौजा अली आशकान में कहा कि इमाम हुसैन जन्नत के जवानों के सरदार हैं, इसलिए जिन्हें जन्नत में जाने की ख्वाहिश है उनके लिए जरूरी है कि इमाम हुसैन की पैरवी करें और बातिल के खिलाफ हमेशा खड़े रहें। हक की हिमायत करें। मेन रोड पर तकरीर करते हुए मौलाना जीशान हैदर बनारस ने इमाम हुसैन की शहादत को बयान किया। जुलूस में अंजुमन जैनुल एबा रायबरेली, अंजुमन शरीफे नसरुल अजा अंबेडकरनगर, अंजुमन असगरिया गाजीपुर, अंजुमन गुंचाए नासिरूल अजा बड़ागांव जौनपुर, अंजुमन सिपाहे मेंहदी शिवली आजमगढ़ आदि ने खिराज-ए-अकीदत पेश किया। संचालन सागर आजमी और अर्शी जौनपुरी ने किया। शिया कमेटी के अध्यक्ष सैयद कायम रजा और मीडिया प्रभारी सैयद मोहम्मद हुसैन ने आभार प्रकट किया।
एक नवंबर को ख्वातीन की शब्बेदारी
मेजवां। जैनबिया वेलफेयर सोसाइटी की बैठक फूलपुर के दसमड़ा गांव स्थित इमामबारगाह में बिलकिस जमाल की अध्यक्षता में हुई। इसमें जनाबे सकीना की याद में एक नवंबर को होने वाली ख्वातीन की शब्बेदारी की तैयारियों पर चर्चा हुई। जाकिरा ख्वाहर शीरी अंबेडकर नगर, पैकर आजमी और निकहत मजलिस को खिताब करेगी। जनानी अंजुमने जीनते अजा दसमड़ा, जुल्फेकरिया पाइंदापुर जौनपुर, असगरिया कदीम अमहट सुल्तानपुर, तंजीमुल हुसैनी, बड़ागांव घोसी नौहाख्वानी करेंगी। इस मौके पर मुहम्मद अब्बास, जैगम अब्बास, सैयद मुहम्मद हसन, फकरे आलम, रिजवान, अंसार हुसैन, सबा, सरवत बानो, सीमा बानो, नीलम, सलमा, तमन्ना, हुमा, सना, मुस्कान, फातमा, आफताब, सखावत हुसैन, अब्बास आदि मौजूद थे।
मार्टीनगंज तहसील पर अपनी मांगो को लेकर प्रदर्शन करती कालेपुर कठरवां की महिलाएं।- फोटो : AZAMGARH