भवन िनर्माण अधूरा, भटक रहे बस यात्री
रोडवेज भवन का निर्माण कार्य न पूरा होने से निगम की सारी बसें सड़क पर खड़ी हो रहीं है। ऐसे में यह ठिकाना नहीं रहता कि कौन सी बस किस स्थान से मिलेगी। बस ढूंढने के चक्कर में यात्री परिवार सहित इधर-उधर भटकते रहते हैं। इस दौरान बसों के आड़े तिरछे खड़े रहने के कारण वे वाहनों की चपेट में आकर घायल हो जाते हैं। बारिश के मौसम में यह परेशानी और बढ़ जाती है।
रोडवेज भवन का निर्माण न होने से जहां यात्रियों को मुसीबत झेलनी पड़ रही। वहीं विभागीय अधिकारी और कर्मचारी भी परेशान हैं। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए आरएम की तरफ से हर माह शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
वर्ष 2014 में तात्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रोडवेज के पुराने भवन को तोड़कर इसके स्थान पर नया और अत्याधुनिक भवन तैयार करने का प्रस्ताव पास किया। इसके लिए 16 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया। धन की पहली किस्त के रुप में 12.30 करोड़ अवमुक्त कर दिया गया। इस प्रोजेक्ट को दिसंबर 2016 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। बजट मिलने के बाद कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने जून 2015 में पुराने भवन को तोड़कर नए भवन का निर्माण शुरू कर दिया।
रोडवेज भवन टूटने और परिसर में निर्माण होने से पूरा रोडवेज विभाग सड़क पर आ गया। आलम यह रहा कि यात्रियों को यह पता ही नहीं चलता कि कौन से शहर की बस किस स्थान से मिलेगी। जिस चालक को जहां जगह मिलती है। वहीं अपनी बस खड़ा कर देता है। रोडवेज के आसपास सड़क पर बसें खड़ा हो जाने से उस तरफ से गुजरना मुश्किल हो गया है।
विभागीय अधिकारियों ने समस्या से निजात पाने के लिए जजी का मैदान और पायलट वर्कशाप की जगह का चयन किया। लेकिन इन दोनों जगहों पर चालक कभी बस लेकर गए ही नहीं। ऐसे में पूरा रोडवेज विभाग वर्ष 2015 से ही सड़क पर चल रहा है। लोगों को उम्मीद थी कि दिसंबर 2016 में निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। लेकिन धनाभाव के चलते नवंबर 2016 में ही काम ठप हो गया।
निर्माण कार्य ठप हो जाने से रोडवेज के अधिकारी और यात्री निराश हो गए। लेकिन सूबे की कमान संभालने के बाद मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने 31 मार्च 2017 को रोडवेज के निर्माण के लिए 1.80 करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिया। धन मिलते ही निर्माण कार्य शुरू तो हो गया। लेकिन निर्माण की गति इतनी धीमी है कि उसे पूरा होने में महीनों लग जाएगा। बारिश का मौसम होने की वजह से यात्री, कर्मचारी और अधिकारियों में इस बात की चर्चा है कि अभी और कितने दिन जलालत झेलनी पड़ सकती है।