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पहले गांव बनंे सत्ता का केंद्र

Sun, 17 May 2015 12:17 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
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जब गांवों में बैठकर विकास की योजनाएं बनेंगी और ग्रामसभाओं को शक्तिशाली बनाया जाएगा, तब गांव संपन्न होने-होने के साथ स्मार्ट सिटी की कल्पना भी साकार होगी। आज मैं जिस क्षेत्र में कार्य कर रहा हूं, वहां अपने देश से ज्यादा विदेश के लोग आकर आदिवासियों के बीच कार्य कर रहे हैं। उक्त बातें पद्मश्री अशोक भगत ने शनिवार को नगर के एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में कही।
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उन्होंने कहा, मैं वर्षों बाद अपने जनपद में आया हूं। पद्मश्री मिलने के बाद यहां के लोग मेरा सम्मान करना चाहते थे। मैं यहीं पैदा हुआ और पला बढ़ा हूं। कहा कि झारखंड मेरा कार्य क्षेत्र है, वहां के आदिवासियों, दलितों के लिए मैं काम कर रहा हूं। देश बचाने की मुहिम, सेवा भावना, आदिवासी समाज की सेवा, संरक्षण, प्राकृतिक संपदाओं के संरक्षण का जो कार्य मैंने किया, उसे सरकार ने समझा और महत्व दिया। पुरस्कार हमें ताकत देता है, पुरस्कार हमारा लक्ष्य नहीं है। बोले, जिस क्षेत्र के लिए मैं कार्य कर रहा हूं, यह देश का दुर्भाग्य है कि उन क्षेत्रों में देश से ज्यादा विदेश के लोग कार्य कर रहे हैं। मैं देश के लोगों से आग्रह करूंगा कि देश के ऐसे हिस्सों में जाकर अपनी सेवा दें जहां के लोगों को वास्तविक सेवा और संरक्षण की जरूरत है।
 मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वे आजमगढ़ के लोगों को कुछ देने नहीं बल्कि उनसे मांगने आए हैं कि वे देश में ऐसे स्थानों पर जाकर कार्य कर सकते हैं, जहां उनकी सेवा की जरूरत है। बोले, अगर देश को संगठित होना है तो आदिवासी समाज को साथ लेकर चलना है। आदिवासी क्षेत्र शांत रहेगा तो देश शांत रहेगा। इसलिए इस समाज की उन्नति के लिए कार्य करना होगा। बोले, मैं कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं लेकिन सभी सरकारों को एक ही संदेश दूंगा कि वह गांवों का विकास करें। भोग का युग खत्म होगा, तभी योग का युग शुरू होगा। गांवों में बैठकर विकास की योजनाएं बनाई जाएं और सही तरीके से उसका क्रियान्वयन हों।
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