आजमगढ़। यूं तो शहर में पॉलिथीन पर के इस्तेमाल पर रोक लगाने का दावा किया जाता है। लेकिन शहर के नाले पॉलिथीन से पटे होने से चोक हो गए हैं। ऐसे में नाले में भरी पॉलिथीन सबूत दे रहे हैं कि इसका इस्तेमाल किस स्तर तक हो रहा है। इसके लिए नगर पालिका प्रशासन की ढिलाई और प्रभावी निगरानी के अभाव मानी जा रही है। प्रतिबंधित पॉलीथिन खुलेआम दुकानों, ठेलों और बाजारों में इस्तेमाल हो रही है।
शासन की ओर से पॉलिथीन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बाद भी हर दुकान और ठेले पर पॉलिथीन का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। यह पॉलिथीन दुकान और ठेलों से पहले लोगों के घरों तक और घरों से सीधे कूड़े और नालों में पहुंच रही है। नालों के जरिये यह पॉलिथीन सीधे तमसा में पहुंचकर उसे प्रदूषित कर रही है। जिले में कुल छोटे बड़े 92 नाले हैं। नालों की सफाई के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन शहर के कई इलाकों में नाले पॉलीथिन और अन्य कूड़े-कचरे से पटे पड़े हैं। मड़या, सिधारी, रैदोपुर, सिविल लाइन, हरबंशपुर, मुकेरीगंज अन्य मोहल्लों में नालों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। निकलने वाले कूड़े का नियमित निस्तारण नहीं हो रहा और प्रतिबंधित पॉलीथिन की बिक्री पर भी कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि नगरपालिका दावा है कि उसके द्वारा प्रतिबंधित पॉलिथीन के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है लेकिन हर बाजार में लोग हाथों में सब्जी और अन्य सामान पॉलिथीन में लेकर जाते हुए नजर आते हैं। इस वर्ष नालों की सफाई के लिए 22 लाख 50 हजार रुपये का टेंडर हुआ है। नालों की सफाई के लिए छत्तीसगढ़ से मजदूर भी बुलाए गए हैं।
नालों पर टैपिंग की बनी थी योजना, कागजों में ही सिमटी
नगर के नालों से होकर नदी में जाने वाली पॉलिथीन पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने लगभग पांच वर्ष पहले नालों की टैपिंग की योजना बनाई थी। तत्कालीन डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने पीडब्ल्यूडी और नगरपालिका को इसके लिए निर्देश दिया था। विभागों ने सर्वे भी किया था लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
फोटो संख्या-
नगर पालिका की ओर से प्रतिबंधित पॉलिथीन पर रोक लगाने का अभियान ठंडा हो गया है। हर दुकानदार पॉलिथीन में ही सामान दे रहे हैं। बाद में यही पॉलीथिन नालों में पहुंच जा रही है। -आशुतोष श्रीवास्तव।
00
फोटो संख्या-
यदि नगर पालिका नियमित रूप से पॉलीथिन के खिलाफ अभियान चलाए, दुकानदारों पर जुर्माना लगाए तो रोक लग सकती है। वर्तमान में प्रतिबंधित पॉलीथिन का उपयोग लगातार बढ़ रहा है और नाले कूड़े से भरते जा रहे हैं।-राकेश अगवाल।
00
फोटो संख्या-
नालों की सफाई के दौरान कूड़ा कई दिनों तक किनारे ही छोड़ दिया जाता है, जिससे यह पॉलीथिन फिर नालों में पहुंच जाती है। शहर की नालियां पॉलीथिन से पटी हुई हैं। इससे अक्सर नाला चोक हो जाता है। -सूरज जायसवाल।
00
नगर क्षेत्र में नियमित पॉलिथीन और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चल रहा है। पॉलिथीन जब्त भी किया जा रहा है। दो तीन दिन बाद जिले में अतिक्रमण के खिलाफ फिर से अभियान चलाया जाएगा।-प्रशांत कुमार, ईओ नगरपालिका।
शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र में प्लास्टिक और बोतल से पटा नाला। संवाद- फोटो : 1