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बड़ी फिल्में शोध के बाद ही बनती हैं: धूलिया

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आजमगढ़। पांचवें आजमगढ़ अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव के दूसरे दिन सोमवार को जाने माने फिल्म निर्देशक तिग्मांशु धूलिया निर्देशित फिल्म “बारिश और चाऊमिन” का प्रदर्शन किया गया।
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फिल्म दिखाने के बाद तिग्मांशु धुलिया ने दर्शकों से संवाद किया और अपने अनुभवों को साझा किया। सूत्रधार संस्थान की ओर से आयोजित फिल्म फेस्टिवल में उन्होंने दिवंगत अभिनेता और अपने मित्र इरफान को याद कर कहा कि “हासिल” फिल्म के प्रमुख किरदार के रूप में वो पहले मनोज वाजपेयी को कास्ट करना चाहते थे, लेकिन मनोज ने नकारात्मक भूमिका के कारण इस रोल के लिए अपनी असहमति जताई। फिर इरफान खान को इस किरदार मिला। हासिल फिल्म इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र अनुभवों पर आधारित है। उन्होंने बताया कि पहले कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में काम किया। पान सिंह तोमर फिल्म बनाने का ख्याल रिसर्च के लिए संडे मैगजीन पढ़ने व उसमें पान सिंह तोमर के बारे में छपी तस्वीर से आया। वही दौर बैंडिट क्वीन फिल्म के निर्माण के वक्त भी आया था। जब भी किसी प्रोड्यूसर से फिल्म पर स्क्रिप्ट के बाबत रिसर्च की बात करते हैं, तो वो इसके लिए तैयार नहीं होते। जबकि हमारा अनुभव है कि बड़ी फिल्म जो भी बनती है वो रिसर्च के बाद ही बनती है। बैंडिट क्वीन और पान सिंह तोमर इसके उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि अपने सपनों के पसंदीदा कलाकार गोविंदा को लेकर फिल्म बनाने के सपने संजोए मुंबई से हैदराबाद तक की यात्रा बस से लटक कर की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय का मूल रूप जो उनके विद्यार्थी जीवन के समय था क्या हम पुनः उस स्वरूप को आज के युवाओं को दिखा सकते हैं के सवाल पर धुलिया ने कहा कि वो खुद इसके लिए प्रयासरत हैं । कुछ प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, तो वहीं आगामी फिल्म जो की चित्रकूट जंगल दस्यू के जीवन पर आधारित बड़ी फिल्म है, दर्शकों को पसंद आएगी। इस मौके पर अनीता द्विवेदी, डॉ. मनीषा मिश्रा, डॉ. पूनम तिवारी, डॉ. नेहा दुबे, चार्ल्स थॉमसन, समाजसेवी प्रज्ञा राय, विजयलक्ष्मी, सरोज यादव, सोनल श्रीवास्तव, अलका सिंह, पूनम सिंह निरुपमा पाठक आदि उपस्थित थे।
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