जल निगम की ओर से लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए मशीनों की मरम्मत से लेकर रिबोर आदि का चाहे जितना भी दावा किया जा रहा हो, लेकिन स्थिति इसके उलट है। अहरौला ब्लॉक में विभाग की ओर से कुल 2752 हैंडपंप लगाए गए हैं। इस साल 50 हैंडपंप रिबोर करने के लिए ब्लॉक में पत्रक आए हैं। इसके अलावा सैकड़ों ऐसे हैंडपंप हैं, जो पानी देना बंद कर दिए हैं। गर्मी अपना रंग दिखाने लगी है लेकिन विभाग अभी तक मौन है।
ब्लॉक के लिपिक जगदंबा दुबे ने बताया कि ब्लॉक में लगभग 50 मशीन को रिबोर करने के लिए प्रार्थना पत्र मिले थे। इसका पत्र बनाकर जलनिगम को भेज दिया गया लेकिन क्या हुआ, कुछ पता नहीं चल सका। ब्लॉक क्षेत्र के गहजी ग्राम सभा में तीन स्थानों पर विभाग की ओर से बोरिंग करके मशीन नहीं लगाई गई। इसके कारण ग्रामीण दूषित पेयजल पीने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं अहरौला ब्लॉक के गोपाली पट्टी गांव, जो 2015-16 में लोहिया गांव के रूप में चयन हुआ। यहां अभी तक एक भी इंडिया मार्का हैंडपंप नहीं लगाया जा सका है।
स्कूलों में भी स्थिति खराब
अहरौला ब्लॉक के प्राथमिक और जूनियर विद्यालय अलौवा में एक-एक हैंडपंप हैं लगाया गया ेकिन दोनों ही खराब पड़े हैं। फरीदपुर प्राथमिक विद्यालय में भी हैंडपंप खराब है और कोठरा स्थित विद्यालय में लगा हैंडपंप दूषित पानी दे रहा है। बेंदुई के प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में लगा दोनों हैंडपंप खराब हैं। विद्यालयों के खराब हैंडपंपों की सूचना प्रधानाध्यापकों द्वारा खंड शिक्षा अधिकारी को दी गई लेकिन कोई पहल न होने से भीषण गर्मी में बच्चे पानी के लिए भटकने केे विवश हैं। खंड शिक्षाधिकारी सुरेंद्र यादव ने बताया कि कई स्कूलों से शिकायती पत्र मिले थे। जिन्हें ब्लॉक पर भेज दिया गया है।