खराब सोलर लाइटें अधिक मूल्य पर खरीदकर 11 लाख रुपये की हेराफेरी करने के आरोपी मेहनगर के खंड विकास अधिकारी विक्रमादित्य पांडेय को ग्राम विकास आयुक्त के निर्देश पर सीडीओ ने निलंबित कर दिया। वहीं, इनके विरुद्ध मेहनगर थाने में कोर्ट के आदेश पर संयुक्त विकास आयुक्त गोरखपुर मंडल गोविंद लाल श्रीवास्तव ने भी धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
विकास खंड मेहनगर के पूर्व बीडीओ गोविंद लाल श्रीवास्तव का प्रमोशन हो जाने के बाद वे गोरखपुर मंडल के संयुक्त विकास आयुक्त के पद पर तैनात हो गए। इनके द्वारा शुक्रवार को दर्ज कराई गई रिपोर्ट में मेहनगर ब्लाक के बीडीओ विक्रमादित्य पांडेय और उनके दो सहयोगियों को आरोपित किया गया है। उनका आरोप है कि यह लोग पुरानी सोलर लाइट को नया दिखाकर 11 लाख दो हजार छह सौ रुपये फर्जी बिल वाउचर के आधार पर सरकारी धन हड़प लिए। यह खरीदारी नौ अक्तूबर 2014 से 11 नवंबर 2014 के बीच की गई है।
गोविंद लाल के अनुसार, इस मामले की जानकारी होने पर उन्होंने उच्चाधिकारियों से जांच कराने की मांग की थी। साथ ही रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इधर, विक्रमादित्य के विरुद्ध चल रही जांच पूरी होने पर इनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया।
कोर्ट के आदेश पर विक्रमादित्य और उनके सहयोगियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई। एसओ मेहनगर अनिल चंद तिवारी ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच वह स्वयं कर रहे हैं। सीडीओ महेंद्र वर्मा ने बताया कि करीब एक सप्ताह पूर्व ही बीडीओ विक्रमादित्य पांडेय को निलंबित कर दिया गया है। इनके स्थान पर गैरजनपद से आए नए बीडीओ को तैनात कर दिया गया है। वहीं, बीडीओ रहे विक्रमादित्य पांडेय ने बताया कि सारे आरोप बेबुनियाद हैं। उन्हें किसी बड़ी साजिश के तहत फंसाया गया है।