अब परिषदीय विद्यालयों में भी सीबीएसई की तरह ही बाल संसद का गठन किया जाएगा। इसी तरह पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में मीना मंच की व्यवस्था की जाएगी। बाल संसद और मीना मंच में शामिल बच्चों को विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराया जाएगा, ताकि उनमें जिम्मेदारियों का भाव जाग सके। राज्य परियोजना निदेशक ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर निर्देश जारी कर दिए हैं। इनमें प्रार्थना, योग, व्यायाम, स्वच्छता, पेयजल व्यवस्था, कक्षा की क्रियाएं, अनुशासन, मध्याह्न भोजन वितरण व्यवस्था, मीना की कहानियां, एवं पुस्तकालय की किताबों का वितरण एवं पाठन आदि शामिल है। बाल संसद में प्रधानमंत्री, उप प्रधानमंत्री के अलावा सात मंत्रिमंडल होंगे। इसका नेतृत्व मंत्री और उपमंत्री द्वारा किया जाएगा। प्रत्येक सदन में मंत्री एवं उपमंत्री के अतिरिक्त चार सहयोग सदस्य (दो बालक, दो बालिकाएं) होंगे। इनका संरक्षण शिक्षकों को करना होगा। बीएसए अतुल कुमार सिंह ने बताया कि बाल संसद विद्यालय के बच्चे-बच्चियों का एक मंच है। इससे जीवन कौशल का विकास, बच्चों में नेतृत्व व निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करने, विद्यालय गतिविधियों व प्रबंधन में भागीदारी बढ़ाने, विद्यालय को आनंददायी, सुरक्षित व साफ सुथरा रखना है।