‘मुर्दे के बगल में सीट खाली है..जिसे भर्ती होना है वहीं पर हो जाए।’ जी हां! ये बिगड़े बोल जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्रहास के हैं। जिन्होंने बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में एक मरीज को भर्ती कराने की बात पर अस्पताल की ओपीडी बंद करा दी। मरीजों को बाहर करवा दिया।
जिला अस्पताल में इस तरीके के वाकये कोई नए नहीं हैं, लेकिन कोविड-19 के कारण जहां स्थिति इतनी गंभीर है तब चिकित्सक का यह रवैया मरीजों, तीमारदारों और आम लोगों की हिम्मत तोड़ने के लिए काफी है। बता दें कि राजकीय मेडिकल कालेज में मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण अब संदिग्ध मरीजों को जिला अस्पताल में भी भेजा जा रहा है।
वहीं, जिला अस्पताल के चिकित्सकों की ओर से मरीजों को भर्ती करने से इंकार कर दिया जा रहा है। बुधवार को पीएचसी पल्हना से आया कोरोना संदिग्ध मरीज तीन घंटे तक एंबुलेंस में पड़ा रहा। चिकित्सक अस्पताल में जगह न होने का बहाना बनाकर उसे भर्ती नहीं कर रहे थे।
रात में सीएमओ डॉ. एके मिश्रा पहुंचे तो मरीज को भर्ती किया गया। गुरुवार सुबह हादसे में घायल मरीज के पहुंचने पर जिला अस्पताल में इस समय सर्वेसर्वा की भूमिका में दिख रहे डॉ. चंद्रहास भड़क गए। उन्होंने कहा कि मरना है तो जिला अस्पताल आइये।
नहीं तो मरीज को कहीं और ले जाइये। ये कहते हुए जिला अस्पताल की ओपीडी बंद कर दी गई। मरीजों को बाहर कर दिया गया। इस बारे में जिलाधिकारी एनपी सिंह ने कहा कि मामला संज्ञान में आया था। जिला अस्पताल के एसआईसी और चिकित्सक दोनों को फटकार लगाई गई है। व्यवहार में सुधार लाने को ताकीद किया गया है।