दरियापुर नेवादा कूबा महाविद्यालय में मंगलवार को भारत में जनसंख्या वृद्धि और ग्रामीण आजिविका सुरक्षा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कृषि वैज्ञानिक प्रो. कीर्ति सिंह ने कहा कि हमें अपनी जनसंख्या को संसाधन के रुप मे लेकर रोजगार का विस्तार करना होगा। जबकि पिछड़ापन दूर होने से ही भारत शक्तिशाली देश बनेगा।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की बौद्धिक परिचर्चा समाज की यथार्थ स्थितियों का बोध करती है। हमें गांव में बैठकर गांव की नीतियां बनानी होंगी।
तभी गांव की स्थिति सुधारी जा सकती है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. एपी मिश्रा ने कहा कि जब सृष्टि का विकास हुआ तब छह से 12 जीव पृथ्वी पर थे, उनको भी आजिविका की समस्या हुई थी।
डेविड हार्वे ने कहा था कि हमें पश्चिम के विकास के विषय के रुप में ग्रामीण विकास को लेना चाहिए। हमने गांव की पुरानी व्यवस्था को हमने नष्ट कर दिया
जो गांव की आवश्यकता को स्वयं पूरा कर देती थी और इसी का दुष्परिणाम हुआ कि गांव नष्ट होने लगे उनके लोगों का पलायन शहरों की ओर होने लगा। विकास की मूलभूत आवश्यकता मानवीय पूंजी है,
उसका हमें मूल्यांकन करना चाहिए। वाराणसी के प्रो. वीके राय ने गिरते भू-जल की स्थिति पर चर्चा की। अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य बयालसी महाविद्यालय जौनपुर डा. उमाशंकर सिंह और संचालन डा. देवेंद्र प्रताप सिंह ने किया।
प्राचार्य डा. अनिल कुमार सिंह ने आभार जताया। इस मौके पर डा. योगेंद शंकर सिंह, सत्यनारायण सिंह, डा. महेंद्र प्रताप सिंह, डा. दिग्विजय सिंह, डा. अशोक सिंह, डा. तरुण कुमार द्विवेदी, डा. रामधीरज, डा. अशोक कुमार यादव, सुशील कुमार पांडेय आदि उपस्थित थे।