आजमगढ़। अजीत हत्याकांड की ही साजिश आजमगढ़ में होने की बात सामने का बाद आधिकरकार जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षख पर गाज गिर ही गई। इसके संभावना लगभग 20 दिन पहले एडीएम प्रशासन औप एसपी सिटी की जेल के औचक निरीक्षण के बाद ही जताई जाने लगी थी। डीएम ने निरीक्षण की गोपनीय रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इसमें जिले प्रशासन के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी की गई थी। रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ जेल अधीक्षख आरके मिश्रा को महानिदेशक कारागार के कार्यालय से अटैच कर दिया गया है।फतेहपुर कारागार से विनोद सिंह को वरिष्ठ जेल अधीक्षक के पद पर यहां भेजा जा रहा है।
जिला जेल हमेशा ही चर्चाओं में रहा है। इसके पीछे कारण यहां बंद अपराधियों का जेल में होने के बाद भी अपनी जरायम की दुनिया का सफल संचालन किया जाना है। अक्सर ही जेल से रंगदारी मांगने, धमकाने आदि की सूचना आती रहती है। वर्तमान में प्रदेश के अपराधियों की टॉप-10 सूची में शामिल ध्रुव कुमार सिंह उर्फ कुंटू सिंह भी इसी जेल में बंद है। जेल में होने के बाद भी अपने जरायम की दुनिया का संचालन कुंटू सिंह बदस्तूर करता चला आ रहा है। वह जेल में है, लेकिन जेल के बाहर उसकी पैठ अक्सर ही देखने को मिली है। कुछ दिनों पूर्व ही सगड़ी तहसील में तैनात एक कर्मचारी को ही जेल से कुंटू ने धमकाया था। वहीं जहानागंज क्षेत्र के एक व्यक्ति ने जेल से फोन कर कुंटू द्वारा धमकाएं जाने का आरोप लगाया था। इन दोनों मामलों में जीयनपुर कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज हुआ था। अब लखनऊ पुलिस ने अजीत हत्याकांड के तार सीधे तौर पर जिला कारगार से जोड़ दिया है तो पुलिस व प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरके मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति तक कर दी गई थी। इसके बाद शासन की ओर से उन्हें मुख्यालय अटैच किया गया है।
डेढ़ साल पूर्व जेल से बरामद हुई थी दर्जनों मोबाइल
आजमगढ़। जिला कारागार प्रशासन अभी नहीं काफी पहले से ही संदिग्ध रहा है। लगभग डेढ़ साल पूर्व जिला कारागार में कैदियों के दो गुटो के बीच भिड़त हो गई थी। पुलिस महकमा काफी मशक्कत के बाद जेल में हुए उपद्रव पर काबू पा सका था। इसके बाद जेल का निरीक्षण हुआ तो जेल परिसर से दर्जन भर मोबाइल सेट बरामद हुए थे।
स्थानांतरण के बाद भी जमे रहे जेल अधीक्षक
आजमगढ़। जिला कारागार के अधीक्षक आरके मिश्रा का पूर्व में स्थानांतरण भी हो चुका है। यहां नैनी जेल के अधीक्षक को भेजा गया था, लेकिन न तो नैनी जेल के अधीक्षक यहां आए न ही आरके मिश्रा ही यहां से गए। अधीक्षक के स्थानांतरण का मामला कागजातों से शुरू हुआ और कागजातों में ही दब कर रह गया।