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Azamgarh News: आजमगढ़ बना अवैध हथियारों का केंद्र, एक महीने में पकड़े गए 17 तमंचे, पिस्टल

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विकास विश्वकर्मा
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आजमगढ़। आजमगढ़ अवैध हथियारों का गढ़ बना हुआ है। एक महीने में 17 तमंचे और पिस्टल पकड़े गए हैं। शहर से लगायत ग्रामीण अंचल में अवैध हथियारों की आवक कम नहीं हो रही है। शहर और देहात में कहां से कितने अवैध हथियार लोगों तक पहुंच रहे हैं इसका सटीक आंकड़ा तो नहीं है, लेकिन एक महीने में पुलिस ने 17 तमंचे, पिस्टलें जरूर पकड़ी हैं। दो दशक पहले जिले में मुबारकपुर के बम्हौर में तमंचा बनाने का बड़े पैमाने पर काम होता था। अंदेशा है कि पुलिस के सामने यह हथियार तो आ गए। इससे कहीं ज्यादा अपराधियों तक पहुंच चुके हैं।

कई बड़े आपराधिक मामलों में आजमगढ़ के अपराधियों का नाम आ चुका है। चाहे वह अहमदाबाद सीरियल बम धमाका हो या बाटला हाउस कांड या फिर कैसेट किंग गुलशन कुमार हत्याकांड। सभी घटनाओं के तार आजमगढ़ से जुड़े। ऐसी ही बड़ी घटनाओं को लेकर आजमगढ़ का नाम सुर्खियों में रहा है। यही वजह रही कि सुरक्षा एजेंसियों भी आजमगढ़ को लेकर अलर्ट रहती हैं। पुलिस भी असलहों के बड़े सप्लयारों को पकड़ नहीं सकी है।
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20 अक्तूबर से 20 नवंबर के बीच अलग-अलग थाना क्षेत्रों में अब तक 17 तमंचे व पिस्टल जब्त हो चुके हैं।

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गुलशन कुमार की हत्या में प्रयोग हुआ था बम्हौर का असलहा

कैसेट किंग गुलशन कुमार की 12 अगस्त 1997 में मुंबई के जुहू इलाके में गोली मार कर हत्या की गई थी। हत्याकांड में प्रयुक्त असलहा बरामद होने पर जिले का नाम आया था। क्योंकि असलहे पर मेड इन बम्हौर लिखा था। इसे बम्हौर की तलाश करते हुए मुंबई पुलिस भी आई थी। मुबारकपुर थाना क्षेत्र का बम्हौर एक गांव है। दो दशक पहले तक अवैध असलहा का बड़ा गढ़ हुआ करता था। तमसा तट के किनारे कई अवैध असलहा कारोबारी अवैध रूप से असलहा बनाते व बेचते थे। वर्तमान में बम्हौर गांव में अवैध असलहा बनाने की फैक्ट्री तो बंद हो चुकी है।

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प्रतिबंधित कारतूसों के स्रोत का पता लगाने में पुलिस नाकाम

कारतूस पर प्रतिबंध है। इसके बाद भी कारतूस कहां से अपराधियों और तस्करों को मिल रहे हैं यह बड़ा प्रश्न है। जबकि अपराधियों के पास से भारी मात्रा में कारतूस मिलते हैं। पुलिस ये पता लगाने में नाकाम रहती कि आखिर बदमाश कारतूस कहां से लाते हैं।

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15 तमंचा व दो पिस्टल बरामद

आंकड़ों को देखा जाए तो पुलिस ने एक माह में 15 तमंचे और दो पिस्टल और कारतूस एक महीने के अंदर बरामद किए हैं। इसमें कप्तानगंज पुलिस ने 16 अक्तूबर को तमंचा, शहर कोतवाली पुलिस ने 18 व 30 अक्तूबर को एक तमंचा व एक पिस्टल जब्त किया। वहीं अहरौला थाने की पुलिस ने 20 अक्तूबर को तमंचा, सिधारी थाने की पुलिस ने 21 अक्तूबर को तमंचा बरामद किया। वहीं सरायमीर थाने की पुलिस ने 21 अक्तूबर व पांच नवंबर को तमंचा बरामद किया। वहीं कंधरापुर में 25 अक्तूबर को एक तमंचा, देवगांव में 26 अक्तूबर को एक तमंचा, जहानागंज में 28 अक्तूबर को एक तमंचा व दो पिस्टल बरामद किए। बरदह थाने की पुलिस ने 29 अक्तूबर को एक तमंचा, जीयनपुर में एक नवंबर को एक तमंचा, महराजगंज में एक नवंबर को एक तमंचा व कारतूस बरामद किए।
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बदमाशों के पास से जो हथियार बरामद होते हैं उनका पता नहीं लग पाता आखिर वो कहां से आए हैं। पकड़े गए बदमाश बताते हैं कि वह उससे लाए, जब उससे पूछो तो वो भी दूसरे को बताता है। ऐेसे में पता लगाना मुश्किल हो जाता है। हालांकि जिले में हथियार बनाने का काम कहीं नहीं होता। यदि होता तो कार्रवाई जरूर करतें। पुलिस क्षेत्र में इसे लेकर नजर बनाए हुए है।

- हेमराज मीणा, एसपी आजमगढ़
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