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रोडवेज परिसर में शौचालय नहीं, गंदगी का अंबार

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आजमगढ़। लाखों रुपये खर्च कर भले ही अत्याधुनिक रोडवेज भवन का निर्माण हुआ है, लेकिन अभी भी कई मूलभुत सुविधाओं की दरकार है। रोडवेज परिसर में कोई शौचालय या पेशाब घर न होने से जहां लोग सड़क के किनारे करने को मजबूर हैं, वहीं इसकी वजह से दुर्गंध और गंदगी का अंबार लगा रहता है। पीने के पानी के लिए भी यात्रियों को इधर-उधर भटकना पड़ता है। खासतौर से महिला यात्रियों को काफी परेशानी होती है। यात्रियों के बैठने से लेकर अन्य तरह की दुव्र्यवस्थाएं व्याप्त हैं। जिन्हें तत्काल दूर किया जाना आवश्यक है। रोडवेज के हालात पर गौर करें तो पूरबी गेट से मऊ और गाजीपुर की ओर की बसें निकलती हैं। जबकि दक्षिणी गेट से वाराणसी, लखनऊ, इलाहाबाद, फैजाबाद, जौनपुर मार्ग के लिए बसों की निकासी होती है। जबकि अन्य सभी डिपो की बसों का प्रवेश पश्चिमी गेट से होता है। लेकिन इन तीनों गेट के पास शौचालय या पेशाब घर नहीं है। ऐसे में पश्चिमी गेट से डिपो में घूसकर जो यात्री मऊ या गाजीपुर जाना चाहता है। वह तत्काल पहुंचकर बस में बैठ जाता है। यहां पर शौचालय की व्यवस्था न होने से लोग दीवार के पास लघुशंका करने को मजबूर है। यही हाल पूरबी गेट का भी है। पूरबी गेट पर यात्रियों की संख्या अधिक होने की वजह से आसपास का परिसर भी गंदा रहता है। यात्रियों के बैठने के लिए पूछताछ केंद्र के ठीक सामने व्यवस्था की गई, लेकिन फैजाबाद, लखनऊ, कानपुर आदि लंबी दूरी की बसें डिपो के पीछे से निकलती हैं, जबकि वाराणसी, लखनऊ, इलाहाबाद, जौनपुर आदि की बसें अगले गेट से निकलती हैं। यह सभी गेट प्रतिक्षालय से दूर होने के नाते पता नहीं चलता कि कौन सी बस कब निकल रही। आलम यह होता है कि यात्री बैठे रहते हैं और बसें निकल जाती हैं। रोडवेज कार्यालय में शौचालय और पानी की व्यवस्था तो की गई है, लेकिन बस निकल न जाए इसको लेकर यात्री परेशान रहते हैं और उन्हें अधिक रुपये खर्च कर पानी पीना पड़ता है। वहीं, रोडवेज भवन परिसर में ही पूछताछ केंद्र दिन के समय दो कर्मचारी और रात के समय सिर्फ एक ही तैनात रहता है। इससे यात्रियों को बसों की सूचना मिलने में दिक्कत होती है।
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डिपो में शौचालय की व्यवस्था होने के बावजूद लोग बाहर दीवार पर पेशाब कर देते हैं, जबकि गार्ड की ड्यूटी भी लगाई गई है। बावजूद इसके लोग नहीं मानते। पूछताछ केंद्र पर एक ही आदमी की जरुरत है। यहां कोई विशेष काम नहीं रहता।
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- ललीत कुमार श्रीवाऱ्स्तव, एआरएम, आंबेडकर डिपो
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