इसी ऑटो को चलाकर से वह अपने परिवार का भरण पोषण करता था। बीते कुछ माह में आर्थिक तंगी के चलते किस्त नहीं भर सका था। किस्त न आने पर फाइनेंस कंपनी ने अपने गुर्गों को सक्रिय कर दिया।
कंपनी के गुर्गे अपने साथियों के साथ अक्सर मुंशी को किस्त जमा करने के लिए प्रताड़ित करते थे। ऑटो उठा ले जाने की धमकी देते थे। रोज-रोज की प्रताड़ना से मुंशी डिप्रेशन में आ गया था। गुरुवार सुबह परिवार के लोग खेत में गए थे। उसने फांसी लगाकर जान दे दी। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।