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Azamgarh News: आजमगढ़ में एटीएस की दूसरी बड़ी कार्रवाई, 31 मई को निजामाबाद से मोहम्मद शेख को किया था गिरफ्तार

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एटीएस द्वारा गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद नबील का घर। संवाद
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आजमगढ़ में आतंकी नेटवर्क और कट्टरपंथी गतिविधियों की जांच को लेकर एटीएस ने करीब पांच माह के भीतर दूसरे युवक को गिरफ्तार किया है।
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31 मई 2026 को निजामाबाद थाना क्षेत्र के खुदादादपुर (संजरपुर) से मोहम्मद शेख की गिरफ्तारी के बाद अब 12 सितंबर को दीदारगंज क्षेत्र के चितारा महमूदपुर निवासी 19 वर्षीय मोहम्मद नबील को गिरफ्तार किया गया है।
दोनों मामलों में एटीएस ने सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को कथित तौर पर आतंकी या कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने का आरोप लगाया है।
31 मई को एटीएस ने मोहम्मद शेख को गिरफ्तार किया था। एजेंसी का दावा था कि वह पाकिस्तान स्थित कथित आतंकी नेटवर्क के संपर्क में था और सोशल मीडिया के जरिये युवाओं को जोड़ने का प्रयास कर रहा था।
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एटीएस के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया था कि मोहम्मद शेख को दूसरे राज्य की एक राजनीतिक पार्टी की महिला नेत्री को धमकाने और उनकी हत्या करने का टास्क दिया गया था।
एजेंसी ने दावा किया था कि आरोपी इस कथित मिशन की तैयारी कर रहा था और उसने पिस्टल व कारतूस की व्यवस्था भी कर ली थी। उसके संपर्कों और डिजिटल गतिविधियों की जांच आगे भी जारी रखी गई।
अब शनिवार को दीदारगंज के चितारा महमूदपुर निवासी मोहम्मद नबील को एटीएस ने गिरफ्तार किया है। इसे भी एटीएस ने सोशल मीडिया को ही मुख्य माध्यम बताया है।
प्रतिबंधित आतंकी संगठन अलकायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहा था और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये युवाओं को जोड़ने का प्रयास कर रहा था। उसके मोबाइल फोन की जांच में आपत्तिजनक सामग्री और कथित तौर पर कोड में बातचीत मिलने का दावा किया गया है।
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डिजिटल नेटवर्क पर निगाह
दोनों मामलों को जोड़कर देखें तो आजमगढ़ में एटीएस की निगाह अब केवल पारंपरिक आपराधिक गतिविधियों तक सीमित नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिये संचालित कथित नेटवर्क पर भी है। 31 मई के बाद 12 सितंबर की कार्रवाई में भी एजेंसी ने युवाओं को ऑनलाइन माध्यम से जोड़ने और आतंकी विचारधारा के प्रचार-प्रसार की बात कही है।
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उर्दू से हाफिजा की पढ़ाई कर चुका है नबील
पड़ोसियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मोहम्मद नबील बेहद शांत स्वभाव का था। वह अपनी मां के साथ रहता था, जबकि उसके पिता दानिश अंसारी सऊदी अरब में रहते हैं। पड़ोसी ने बताया कि घर में मोहम्मद नबील और उसकी मां, दो बहनें, उसकी दादी और दादा मुस्ताख रहते थे। दादा नेत्रहीन हैं। पड़ोसी ने बताया कि नबील सरायमीर क्षेत्र के एक मदरसे में पढ़ता था। वहां से लौटने के बाद वह उर्दू में मोबाइल से छोटी-छोटी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी पोस्ट करता था। स्थानीय लोगों ने बताया कि नबील उर्दू में धार्मिक और शिक्षाप्रद बातें सुनता था। वह मोहल्ले की मस्जिद में जाता था और वहां बच्चों को तालीम भी देता था। इसके बाद सीधे घर लौट आता था। पड़ोसियों के अनुसार, वह आसपास के लोगों से ज्यादा बातचीत नहीं करता था और सामान्य तौर पर शांत ही रहता था। पड़ोसियों का कहना है कि नबील उर्दू से हाफिजा की पढ़ाई पूरी कर चुका है। पुलिस के भय से नबील की मां अपने दो बेटियों के साथ फूलपुर स्थित अपने मायके चली गई।
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