उन्होंने मदरसा संचालकों से कागजात और वित्तीय लेनदेन को दुरुस्त रखने की अपील की, ताकि सरकार को कार्रवाई का मौका न मिले। उन्होंने कहा कि यह अभियान न केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है, बल्कि संविधान की धारा 25, 26 और 30(1) का भी हनन है, जो अल्पसंख्यकों को धार्मिक और शैक्षिक संस्थान चलाने की स्वतंत्रता देती हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मदरसों के खिलाफ यह कार्रवाई धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है और जमीअत उलमा-ए-हिंद इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगी। सम्मेलन में सभी मसलक के मदरसा संचालकों और जिम्मेदारों ने हिस्सा लिया।
मौलाना मदनी ने मदरसा संचालकों से एकजुटता की अपील करते हुए कहा कि यह समय मसलकी मतभेद भूलकर एकता का है। उन्होंने लोगों से सड़कों पर विरोध के बजाय अदालत का रुख करने और मदरसों में कानूनी कमियों को दूर करने की सलाह दी।
मीडिया से बात करते हुए मौलाना मदनी ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य देश में अमन और मोहब्बत कायम रखना है। उन्होंने सरकार से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने की मांग की और कहा कि मदरसों को तोड़ने की कार्रवाई गलत है। मदरसों को मौका दिया जाना चाहिए। ऑपरेशन सिंदूर पर पूछे गए सवाल का उन्होंने जवाब नहीं दिया।