फूलपुर कोतवाली पुलिस ने मुडि़यार मोड़ के पास शनिवार की रात 1.65 लाख रुपये के नकली नोट के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार कर लिया। पकड़ा गया आरोपी मोहम्मद शफीक अहमद गंभीरपुर के कमरावां गांव का निवासी है। वह नकली नोट बिहार के रांची से लाकर किसी को देने जा रहा था। पुलिस उसके मोबाइल के रिकार्ड और पूछताछ में बताए गए कुछ लोगों के नाम और पते की जानकारी जुटाने में लगी है।
पुलिस लाइन में रविवार को एएसपी ग्रामीण मोहम्मद इमरान ने बताया कि फूलपुर के कोतवाल राजीव प्रताप सिंह, उपनिरीक्षक डीके श्रीवास्तव के साथ शनिवार की रात मुडि़यार मोड़ पर वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान बाइक से शफीक भी आता दिखा।
पुलिस ने उसे रोककर जब बाइक के कागजात मांगे तो वह नहीं दिखा सका। शक होने पर उसकी तलाशी ली गई तो उसके पास से 1.65 लाख रुपये बरामद हुए। एक-एक हजार के 165 नोट मिलने पर पुलिस को शक हुआ तो उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इस दौरान उसने बताया कि वह नकली नोट की सप्लाई करने जा रहा था। पुलिस ने जब असली और शफीक के पास से मिले नोटों का मिलान कराया तो उसमें फर्क मिला। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
एएसपी के अनुसार शफीक काफी दिनों से नकली नोट के कारोबार में लिप्त है। उसे वर्ष 2010 और 2011 में गंभीरपुर और फूलपुर कोतवाली पुलिस ने नकली नोट की सप्लाई के मामले में ही गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस लाइन परिसर में पूछताछ के दौरान शफीक ने बताया कि नकली नोटों की खेप पाकिस्तान से नेपाल या बांग्लादेश के रास्ते बिहार आती है। वहां से एजेंटों के माध्यम से अन्य जिलों में भेजी जाती है।
बकौल शफीक, नकली नोट के सौदागर 60 हजार रुपये देने पर एक लाख के नकली नोट देते हैं। उसे इस गोरखधंधे में लाने वाला बिहार के रांची का रहने वाला मुख्य आरोपी निजाम मिर्जापुर की जेल में बंद है।
एटीएस के साथ खुफिया तंत्र जुटा था शफीक की तलाश में
महराजगंज जिले के सोनौली से नकली करेंसी के साथ जावेद शेख के गिरफ्तार होने के बाद से ही जिले की पुलिस के साथ एटीएस और खुफिया तंत्र नकली नोट के साथ पकड़े गए एजेंट मोहम्मद शफीक की तलाश में जुट गई थी।
शनिवार की रात शफीक की गिरफ्तारी की सूचना जैसे ही मिली, सभी जांच एजेंसियां फूलपुर कोतवाली पहुंच कर उससे पूछताछ की। शफीक ने नकली नोट सप्लाई के कारोबार में जुटे गैंग के करीब एक दर्जन सदस्यों के नामों को बताया है। इस पर पुलिस उनकी तलाश में जुट गई है।
165 एक हजार के नकली नोट के साथ गिरफ्तार मोहम्मद शफीक जिले के गंभीरपुर थाने के कमरावां गांव निवासी वकील अहमद का पुत्र है। 55 वर्ष की उम्र का शफीक कक्षा आठ तक की शिक्षा ग्रहण की। पश्चिमी बंगाल के मालदह निवासी मो. इमरान और रांची के नियाज अहमद के जरिए उसे नकली नोट उपलब्ध होता था।
शफीक नकली नोट को जिले के फूलपुर, सरायमीर, देवगांव, वाराणसी, जौनपुर जिले के शाहगंज, अंबेडकर नगर, क्षेत्रों में मौजूद छोटे-छोटे एजेंटों को चलाने के लिए दे देता था। वे लोग नकली नोट को बाजार में चलाने का काम करते हैं।
शफीक को पकड़ने के लिए एटीएस (आतंकवाद निरोधी दस्ता) की एक टीम आजमगढ़ जिले में कैंप की है। टीम ने कई बार घेराबंदी की लेकिन शफीक उनके हत्थे नहीं चढ़ा। शफीक को इस बार पांच लाख रुपये लाने थे लेकिन नोट पूरे न होने की वजह से वह सिर्फ दो लाख रुपये ही पाया।
इनमें से करीब दस हजार रुपया मालदह से आने में खर्च किया। इसके अलावा 25 हजार रुपया वाराणसी के एक एजेंट को बाजार में चलाने के लिए दे दिया है। शेष रुपया लेकर वह जौनपुर जिले के शाहगंज बाजार के एजेंट को देने जा रहा था। शफीक की निशानदेही पर पुलिस पूर्वांचल के करीब एक दर्जन से अधिक उसके एजेंटों की तलाश में जुटी है। - राजीव प्रताप सिंह, कोतवाल फूलपुर
पुलिस की निष्क्रियता से बढ़ा नकली नोटों का धंधा
मोहम्मद शफीक अहमद पहले भी इसी धंधे में पकड़ा जा चुका है। वह जेल से कब बाहर निकलकर फिर धंधे में लिप्त हो गया, इससे पुलिस, खुफिया तंत्र अनभिज्ञ हैं। और भी कई धंधेबाज नकली नोट सप्लाई करते पकड़े जा चुके हैं और बाद में जेल से छूटने पर फिर इस धंधे में शामिल हो गए, लेकिन पुलिस को उनकी भनक तक नहीं है।
पुलिस की निष्क्रियता से ही न केवल आजमगढ़, बल्कि पूर्वांचल में नकली नोटों का कारोबार तेजी से बढ़ा है।
पुलिस की गिरफ्त में आए मो. शफीक की मानें तो उसे वर्ष 2010 में गंभीरपुर और 2011 में फूलपुर कोतवाली पुलिस नकली नोट के साथ गिरफ्तार कर चुकी है। जेल में करीब चार माह रहने के बाद वह जमानत पर बाहर आया। इसके बाद 2012 के नवंबर से फिर इस कारोबार से जुड़ गया। उसने अपना ठिकाना सरायमीर क्षेत्र में बनाया था। वहां नकली नोट इकट्ठे कर ऐसे युवकों को देता था, जिनका कोई पुलिस रिकार्ड नहीं है।
वह इस काम में किशोर और बच्चों को प्राथमिकता देता था। दो दिसंबर 2012 को अहरौला थाने की पुलिस ने 20 हजार रुपये के नकली नोट के साथ चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उसमें दो आरोपी नाबालिग थे। वर्ष 2010 में सिधारी और मुबारकपुर थाने की पुलिस ने भी नकली नोट के कारोबारियों को गिरफ्तार किया था लेकिन वे आरोपी कहां गए, इसकी जानकारी पुलिस या खुफिया विभाग को नहीं है।
मो. शफीक अहमद की गिरफ्तारी के बाद पुलिस हर उन लोगों का रिकार्ड खंगालेगी, जो नकली नोट के साथ गिरफ्तार हुए हैं या आरोपियों के सहयोगी हैं। इन लोगों की पहचान करने में शफीक का मोबाइल फोन मददगार साबित होगा। - मोहम्मद इमरान, एएसपी ग्रामीण